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Rajasthan Election 2018: इस तरह 10 साल बाद पूरा हुआ महेश जोशी का बदला

2008 का विधानसभा चुनाव। पूर्व सांसद महेश जोशी किशनपोल विधानसभा सीट से लड़ने की तैयारी पूरी कर चुके थे, बस सूची में नाम आना बाकी था।
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जयपुर

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kamlesh sharma

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Updated: 17 Nov 2018, 6:13 PM IST

Mahesh Joshi

जयपुर। 2008 का विधानसभा चुनाव। पूर्व सांसद महेश जोशी किशनपोल विधानसभा सीट से लड़ने की तैयारी पूरी कर चुके थे, बस सूची में नाम आना बाकी था। इस दौरान पूर्व राज्यपाल नवकिशोर शर्मा ने चुनावी बिसात बिछाई।

उन्होंने अपने पुत्र बृजकिशोर शर्मा को हवामहल से टिकट दिलाने की मशक्कत शुरू कर दी। नवलकिशोर का नाम कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार था, ऐसे में बृजकिशोर का टिकट लगभग तय था। इसी बीच नवलकिशोर ने चुनावी चाल चली।

हवामहल सीट को नॉन मुस्लिम बनाने के लिए उन्होंने किशनपोल से मुस्लिम को टिकट देने पैरवी की। उनकी यह चाल कामयाब रही और इस सीट से महेश जोशी टिकट काट कर मुस्लिम प्रत्याशी अश्क अली टांक को मैदान में उतारा गया। इस चुनाव में टांक को हार का सामाना करना पड़ा लेकिन नवकिशोर की चाल कामयाब रही और आज भी इस सीट से मुस्लिम को ही प्रत्याशी बनाया जा रहा है।

दस साल बाद राजनीति माहौल बदला नवलकिशोर दुनिया में नहीं रहे और अब चाल चली महेश जोशी ने। आलाकमान साफ निर्देश थे कि मुस्लिमों की सीट नहीं काटी जाए। महेश जोशी इस स्थिति से वाकिफ थे इसलिाए उन्होंने किशनपोल की बजाए हवामहल से टिकट की डिमांड कर दी। उनके सारथी बने पूर्व सीएम अशोक गहलोत।

केन्द्रीय नेता चाहते थे कि नवलकिशोर के कद को देखते हुए बृजकिशोर को ही दुबारा हवामहल से प्रत्याशी बनाया जाए। लेकिन गहलोत और पायलट दोनों ही बृजकिशोर के पक्ष में नहीं थे।

सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट का भी नवलकिशोर से राजनीति दुश्मनी थी। बस यहीं समीकरण महेश जोशी के फायदेमंद साबित हुई और बृजकिशोर शर्मा का टिकट का काटकर महेश जोशी को हवा महल का प्रत्याशी बना दिया गया। इस तरह महेश जोशी ने अपना 10 साल पुराना बदला निकाल लिया।