
सीएम अशोक गहलोत
हाल ही विधानसभा में पास हुए 'राजस्थान मेला प्राधिकरण विधेयक' में किए सख्त प्रावधानों पर दूसरे राज्यों के धर्मगुरुओं में भी नाराजगी है। विधेयक में सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के व्यवस्थापकों को आयोजक कहकर संबोधित किया है। साथ ही प्रदेश के बड़े मंदिरों और दरगाह पर लगने वाले मेलों में निजी ट्रस्टों को जिम्मेदार बनाए जाने से धर्म गुरु, महंत और निजी ट्रस्ट संचालक भी विधेयक के विरोध में हैं। हरिद्वार स्थित जूना अखाड़ा के आचार्य अवधूत बाबा अरुण गिरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राज्यपाल कलराज मिश्र और सीएम अशोक गहलोत को पत्र लिखा। उन्होंने बताया कि विधेयक में कई विसंगतियां हैं। राजस्थान सरकार इसे वापस नहीं लेती है तो संत समाज आंदोलन करेगा। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत रविंद्रपुरी ने कहा कि विधेयक के विरोध में जल्द ही जयपुर में बड़ी तादाद में साधु-संत जुटेंगे।
आयोजकों को प्रशासन का साथ मिलना जरूरी
संतों ने पत्र में लिखा है कि राजस्थान एक धार्मिक स्थान है। यहां हर साल अनेक धार्मिक व सांस्कृतिक मेले आयोजित होते हैं। इनमें स्थानीय लोगों के साथ ही देसी-विेदशी पर्यटक शामिल होते हैं। इन कार्यक्रमों की पूरी जिम्मेदारी आयोजन प्रबंधन पर डालना सही नहीं है। इसमें आयोजकों को प्रशासन का भी साथ मिले ताकि व्यवस्था बनी रहे।
राज्यपाल कलराज मिश्र को लिखा पत्र
राष्ट्रीय महामंत्री, अखिल भारतीय संत समिति, बनारस राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्र आनंद सरस्वती ने कहा, राजस्थान सरकार मेला प्राधिकरण विधेयक को वापस ले या रद्द करें। इस विधेयक को लेकर यूपी के धर्मगुरुओं में भी नाराजगी है। राज्यपाल कलराज मिश्र को पत्र लिखकर धार्मिक स्वतंत्रता और मूल अधिकारों का हनन करने वाले बिलों पर हस्ताक्षर नहीं करने की मांग की है।
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Published on:
06 Aug 2023 11:09 am

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