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कश्मीर और यूपी के बाद राजस्थान में सबसे ज्यादा इंटरनेट बंद

पिछले महीने करौली में साम्प्रदायिक तनाव के बाद वहां मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया। दो दिन पहले जोधपुर में और गुरुवार को भीलवाड़ा में नेटबंदी हुई। तीन अलग-अलग जिलों में प्रदेश की यह पहली नेटबंदी है। वर्ष 2021 में ग्राम सेवक, पटवारी, आरएएस, रीट, सब इंस्पेक्टर परीक्षा सहित अन्य कारण से 6 बार पूरे प्रदेश में इंटरनेट बंद रहा था।

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Mobile internet service - ईद के पर्व पर देश में अमन वहीं जोधपुर में दो गुटों के बवाल ने बढ़ाई हिंसा

Mobile internet service - ईद के पर्व पर देश में अमन वहीं जोधपुर में दो गुटों के बवाल ने बढ़ाई हिंसा

जोधपुर.

पिछले महीने करौली में साम्प्रदायिक तनाव के बाद वहां मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया। दो दिन पहले जोधपुर में और गुरुवार को भीलवाड़ा में नेटबंदी हुई। तीन अलग-अलग जिलों में प्रदेश की यह पहली नेटबंदी है। वर्ष 2021 में ग्राम सेवक, पटवारी, आरएएस, रीट, सब इंस्पेक्टर परीक्षा सहित अन्य कारण से 6 बार पूरे प्रदेश में इंटरनेट बंद रहा था।
पूरे देश में इंटरनेट बंद करने के मामले में राजस्थान तीसरे स्थान पर है। सर्वाधिक नेट बंदी से व्यापारियों,विद्यार्थियों और आम लोगों के साथ-साथ सेल्यूलर कम्पनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक घण्टे नेटबंदी से सेल्यूलर कम्पनी को करीब 2.50 करोड़ का नुकसान होता है।

इंटरनेट बंदी से 200 करोड़ का नुकसान
राजस्थान में 2021 में 6 बार इंटरनेट शटडाउन हुआ है। प्रदेश में इस साल की पहली नेटबंदी, इंटरनेट बंद करने में राजस्थान तीसरे स्थान पर आया था। 8920 घण्टे इंटरनेट बंद रहा था। देश में गत वर्ष 103 करोड़ भारतीय लोग प्रभावित 182 में से 106 बार इंटरनेट शटडाउन भारत में गत वर्ष 200 करोड़ का नुकसान नेटबंदी से हुआ है।

182 में से 106 शटडाउन भारत में
गैर सरकारी संगठन एक्सेस नाऊ की ओर से इंटरनेट शटडाउन पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक बीते साल पूरी दुनिया में 182 बार इंटरनेट बंद किया गया, जिसमें सर्वाधिक 106 बार भारत में बंद हुआ। भारत में सबसे अधिक 85 बार जम्मू कश्मीर में नेटबंदी हुई। इसके बाद उत्तरप्रदेश में जहां करीब दस बाद नेट बंद हुआ। तीसरे स्थान पर राजस्थान और चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है।


क्या कहता है कानून

● पिछले वर्ष अनुराधा भसीन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट की आसान उपलब्धता को मौलिक अधिकार माना था।

● वर्ष 2021 में ही शशि थरुर की अध्यक्षता में संसदीय समिति ने भी बार-बार नेटबंदी पर चिंता जताई और अन्य विकल्प तलाशने का सुझाव दिया।


देश में बार-बार क्यों होती है नेटबंदी

● कानून व्यवस्था

● सुरक्षा कारण, साम्प्रदायिक उन्माद रोकना

● परीक्षा में नकल रोकना

कैसे होते हैं प्रभावित

● ऑनलाइन ट्रांजेक्शन

● पढ़ाई

● बैंकिंग

● सोशियल डिसकनेक्टिंग

● मानसिक अवसाद

टोरशा एनएलयू जोधपुर की स्टूडेंट है। वर्तमान में इंटरन्यूज एनजीओ के साथ इंटरनेट शटडाउन पर रिसर्च कर रही है। टोरशा कहती हैं कि पूरे देश में इंटरनेट शटडाउन होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हर वर्ग प्रभावित होता है। राजस्थान में तो परीक्षाओं के चलते नेटबंदी जैसे परंपरा बन गई है।