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Rajasthan Innovation Vision 2019 : इनोवेशन विजन में दिखे टेक्नोलॉजी के अद्भुत नजारे

Jaipur News : स्टार्टअप्स, इंस्टीट्यूशंस और विभिन्न विभागों से आए एग्जीबिटर्स ने जहां एक ओर अपने टेक्नोलॉजिकल आइडियाज को प्रजेंट कर लोगों को चकित किया

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जयपुर

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Suresh Yadav

Aug 19, 2019

Rajasthan Innovation Visio

Rajasthan Innovation Visio

जयपुर।
कहीं आर्टिफीशियल वाटरफॉल (artificial waterfall) का लुत्फ लेते लोग, तो कहीं टेक्नोलॉजी की आकाश में भविष्य को छूने की कल्पना को साकार करने का उत्साह। यह नजारा सोमवार से बिड़ला ऑडिटोरियम (birla auditorium jaipur) में शुरू हुए राजस्थान इनोवेशन विजन (Rajasthan Innovation Vision 2019) के दौरान देखने को मिला। स्टार्टअप्स, इंस्टीट्यूशंस और विभिन्न विभागों से आए एग्जीबिटर्स ने जहां एक ओर अपने टेक्नोलॉजिकल आइडियाज को प्रजेंट कर लोगों को चकित किया तो वहीं दूसरी ओर विभिन्न सेशंस में आईटी को बूस्ट करने पर मंथन चला।
प्लास्टिक फ्री कैंपस
बिट्स पिलानी से आए एमबीए स्टूडेंट भोमेन्द्र सिंह राठौड़ और धनवीर छाबड़ा ने बताया कि वे कैम्पस को प्लास्टिक फ्री बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कॉलेज के फेस्ट्स को चुना गया है, जिसमें सेलेब्रिटीज और पार्टिसिपेंट्स के लिए प्लास्टिक की बोतल इस्तेमाल नहीं होंगी। इसके लिए ईकोफ्रेंडली बोतल की व्यवस्था की जाएगी, जिसे किसी मेन्यूफेक्चरर से लिया जाएगा। साथ ही हम कैम्पस में बोतल की बजाय वाटर फाउंटेन इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ही कैम्पस में होने वाली कॉन्फ्रेंस और सेमिनार में भी इसी प्रयास को करने की कवायद की जाएगी। जिससे कैम्पस काफी हद तक प्लास्टिक फ्री बन सकेगा।
अब कम्यूनिकेशन होगा आसान
एक्सपो में स्टार्टअप सोनंत की ओर से वीओआईएस पर्सनल इंटरप्रिटर को शोकेस किया गया। एग्जीबिटर ने बताया कि ऐसे ग्लव्स और स्मार्टवॉच डवलप की है, जिससे बोलने और सुनने में अक्षम दिव्यांगों को मदद मिलेगी। ये ग्लव्स और वॉच सामने वाले व्यक्ति की वॉइस को टेक्स्ट में बदलेंगे, जबकि ग्लव्स में मौजूद सेंसर के एल्फाबेट अक्षम व्यक्तियों की लैंग्वेज बनाने में मदद करेंगे। इससे दो लोगों के बीच टेक्स्ट के रूप में एक बेहतरीन कम्यूनिकेशन हो सकेगा।
दूध की क्वालिटी जांची जा सकेगी
एक्सपो में सीरी पिलानी के इंक्यूबेशन सेंटर की ओर से क्षीर टेस्टर का डेमो दिया गया। एग्जीबिटर्स ने बताया कि इस टैस्टर के जरिए दूध की क्वालिटी दो मिनट में पता लगाई जा सकेगी। इसे डेयरी फाम्र्स, शॉप्स के अलावा घरों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए अलग-अलग तरह के टैस्टर बनाए गए हैं। घर वाले टैस्टर की कॉस्ट लगभग पांच हजार रुपए आई है। इसकी टेक्नोलॉजी राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड को दी गई है। अन्य कंपनियों को भी इसकी टेक्नोलॉजी दी जा सकती है।
indigenous technology: अब इंडीजीनस टेक्नोलॉजी
आईआईटी जोधपुर के रिसर्चर्स ने बताया कि वे इंडीजिनस क्वाड कॉप्टर और पेट्रोल से चलने वाला हैलीकॉप्टर बना रहे हैं। इसके साथ ही ऐसी बाइक डवलप कर रहे हैं, जिससे एक्सीडेंट होने की स्थिति में बचा जा सकेगा। जहां क्वाड कॉप्टर का मदर बोर्ड इंडीजीनस होगा, वहीं ये काफी कॉस्ट इफेक्टिव होगा। आईआईटी जोधपुर में इसकी टेक्नोलॉजी डवलप की जा रही है।