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बीकानेर और जोधपुर संभाग से 4-5 अक्टूबर के बाद मानसून की विदाई!

Rajasthan Monsoon Update: राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग से मानसून 4 व 5 अक्टूबर के बाद कभी भी विदाई ले सकता है।

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बीकानेर और जोधपुर संभाग से 4-5 अक्टूबर के बाद मानसून की विदाई!

बीकानेर और जोधपुर संभाग से 4-5 अक्टूबर के बाद मानसून की विदाई!

जयपुर। Rajasthan Monsoon Update: राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग से मानसून 4 व 5 अक्टूबर के बाद कभी भी विदाई ले सकता है। मौसम विभाग की माने तो बीकानेर व जोधपुर संभाग में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा और मानसून के विदा होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही है। पिछले साल भी इन संभागों से मानसून अक्टूबर के शुरूआत में ही विदा हो गया था।

मौसम केन्द्र जयपुर के निदेशक आर.एस. शर्मा के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती तूफान गुलाब का अवशेष कम दबाव के तंत्र के रूप में गुजरात तट के आसपास स्थित है। इसके 30 सितंबर को तीव्र होकर डिप्रेशन के रूप में अरब सागर की खाड़ी में पहुंचने और एक अक्टूबर को फिर से तीव्र होकर चक्रवाती तूफान का रूप लेते हुए पाकिस्तान-मकरान तट की ओर से आगे बढ़ने की संभावना है।

वहीं पूर्वी भारत के झारखंड व आसपास के क्षेत्र के ऊपर एक वेलमार्क लो प्रेशर एरिया भी बना हुआ है। इस सिस्टम के असर से 30 सितंबर से 2 अक्टूबर के दौरान जोधपुर व बीकानेर संभाग के जिलों में कुछ स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश होगी। बीकानेर व जोधपुर संभाग के जिलों में 3 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियों में कमी होगी। लेकिन, 4-5 अक्टूबर के बाद इन दोनों संभाग में मानसून पूरी तरह शुष्क रहेगा। इसके साथ ही मानसून के विदा होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं।

जोधपुर संभाग में 30 प्रतिशत कम पानी
राजस्थान के जोधपुर संभाग में मानसून की मेहर कम रही है और 4-5 अक्टूबर के बाद किसी भी समय मानसून विदाई ले सकता है। लेकिन, इस बार मानसून जोधपुर संभाग के बांधों को नहीं भर सका। बांधों की स्थिति को संभागवार देखा जाए तो जोधपुर संभाग में सबसे कम बारिश हुई है। जोधपुर के 123 बांधों की कुल भराव क्षमता 976.90 एमक्यूएम है और अब तक 103.30 एमक्यूएम पानी है। यानि 10.6 प्रतिशत पानी ही है। जबकि पिछले साल 40.8 प्रतिशत पानी था। यानी इस साल 30 प्रतिशत पानी की कम चल रही है। इस स्थिति में आगामी गर्मियों में जोधपुर संभाग में पानी की समस्या खड़ी हो सकती है। किसानों के सामने भी पानी को लेकर बड़ी परेशानी खड़ी होगी।