
राजस्थान पुलिस ने साइबर अपराध के एक ऐसे विशाल नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जिसके तार कंबोडिया जैसे देशों से जुड़े हुए हैं। यहाँ पुलिस ने एक ऐसी बड़ी स्ट्राइक की है, जिसने सिम विक्रेताओं और साइबर ठगों के बीच के नापाक गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है।
दरअसल, सीमावर्ती जिले अनूपगढ़ पुलिस ने शहर की 9 प्रमुख दुकानों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है, जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर करीब 957 संदिग्ध सिम कार्ड जारी किए। इन सिमों के जरिए पूरे भारत में 17 करोड़ 14 लाख 86 हजार 564 रुपये की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया गया।
अनूपगढ़ थानाधिकारी ईश्वर प्रसाद जांगिड के नेतृत्व में हुई इस जांच ने सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने बताया कि इन 9 सिम विक्रेताओं ने चंद रुपयों के कमीशन के चक्कर में बिना किसी सत्यापन और पहचान के संदिग्ध लोगों को थोक में सिम कार्ड बेच दिए।
पुलिस की प्राथमिक जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह है इन सिमों का कंबोडिया कनेक्शन। अनूपगढ़ से जारी ये सिम कार्ड कभी स्थानीय नेटवर्क पर सक्रिय ही नहीं हुए। एक्टिवेशन के तुरंत बाद इन्हें कंबोडिया भेज दिया गया।
वहां बैठे साइबर अपराधी इन भारतीय नंबरों का इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट' की धमकी देने, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और निवेश के नाम पर लोगों को ठगने के लिए कर रहे थे। चूंकि नंबर भारतीय होते थे, इसलिए शिकार होने वाले लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।
जांच में सामने आया कि कुछ दुकानों ने ठगी के नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए।
उप निरीक्षक गोविंद सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, इन विक्रेताओं ने दूरसंचार विभाग (DoT) के नियमों को पैरों तले रौंद दिया।
गृह मंत्रालय के I4C (इंडियन साइबर अपराध समन्वय केंद्र) और नेशनल साइबर पुलिस पोर्टल (1930) के समन्वय से जब इन नंबरों का 'ट्रैक रिकॉर्ड' निकाला गया, तब जाकर ठगी के इस भयावह आंकड़े का पता चला।
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन स्थानीय दुकानदारों को सिम सप्लाई करने वाले मास्टरमाइंड कौन हैं और वे किन अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के संपर्क में थे?
Updated on:
03 Feb 2026 03:49 pm
Published on:
03 Feb 2026 03:49 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
