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Hanuman Beniwal : किसान आंदोलन को लेकर RLP सांसद ने अब संसद में उठाया ये बड़ा मुद्दा

संसद का शीतकालीन सत्र, शून्य काल में बोले आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल, सदन में उठाया किसान आंदोलन से जुड़ा मुद्दा, आंदोलन में मारे गए किसानों को आर्थिक पैकेज की मांग, किसानों पर दर्ज़ मुकदमे वापस लेने की भी मांग  

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Rajasthan RLP MP Hanuman Beniwal raise Farmers Issue in Lok Sabha

जयपुर।

आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल ने आज लोकसभा में किसान आंदोलन से जुड़ा मुद्दा उठाया। शून्य काल के दौरान मुद्दा उठाते हुए बेनीवाल ने केंद्र सरकार से किसान आंदोलन के दौरान मारे गए 700 से भी ज़्यादा किसानों को मुआवज़ा देने की मांग उठाई। बेनीवाल ने कहा कि सरकार इन मृतक किसानों के परिवारों का जल्द से जल्द सर्वे करवाकर उनके लिए आर्थिक पैकेज घोषित करे।

सांसद बेनीवाल ने किसान आंदोलन के दौरान ही विभिन्न राज्यों में किसानों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की भी मांग उठाई। बेनीवाल के साथ ही कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील ने भी मृतक किसानों के परिजनों को मुआवज़ा देने और किसानों पर दर्ज़ मुकदमे वापस लेने की केंद्र सरकार से मांग की।

गौरतलब है कि सांसद हनुमान बेनीवाल किसान आंदोलन और किसानों के समर्थन में लगातार आवाज़ उठाते रहे हैं। किसानों के समर्थन और केंद्र सरकार के विरोध के चलते ही उन्होंने एनडीए से आरएलपी पार्टी का नाता तोड़ लिया था।

केंद्र सरकार ने कहा कि तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर साल भर से चल रहे आंदोलन के दौरान कितने किसानों की मौत हुई है, इसका कोई आंकड़ा नहीं है, इसलिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रश्न ही नहीं उठता। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने लोकसभा में सांसदों के एक समूह द्वारा ‘कृषि कानूनों के आंदोलन’ पर उठाए गए सवालों के जवाब में यह बात कही।

अन्य सवालों के अलावा, सांसद आंदोलन के संबंध में किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या जानना चाहते थे। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजधानी में और उसके आसपास चल रहे आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों की संख्या पर डेटा और क्या सरकार का उक्त आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिजनों को वित्तीय सहायता प्रदान करने का विचार है, इसकी जानकारी भी मांगी गई थी।

मंत्रालय का इस पर स्पष्ट उत्तर था कि इस मामले में उसके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है और इसलिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रश्न ही नहीं उठता। इस प्रश्न के पहले भाग में जवाब देते हुए विस्तृत रूप से बताया गया था कि कैसे सरकार ने स्थिति को काबू में करने के लिए किसान नेताओं के साथ 11 दौर की चर्चा की है। तीन विवादास्पद कानूनों (farm laws) को निरस्त करने की मुख्य मांग के अलावा - जिन्हें अब आधिकारिक तौर पर संसद द्वारा निरस्त कर दिया गया है - एक साल से अधिक समय से चल रहे आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और मृतक किसानों को मुआवजे का भुगतान करने की भी मांग की गई है।

किसान आंदोलन के दौरान मृतक किसानों के परिजनों के लिए पुनर्वास की मांग भी की गई है। बता दें कि किसान नेताओं ने आंदोलन के दौरान मृतक किसानों को शहीद किसान कहा है। आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा ने दावा किया है कि पिछले साल से आंदोलन के दौरान लगभग 700 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं।

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