rajasthan roadways में एजेंसी के जरिए लगे 2500 चालक मंगलवार से अनिश्चितकालीन strike पर जा रहे हैं। Rajasthan Roadways संविदा चालक संघ ने इसकी घोषणा की। ऐसे में त्यौहार के बीच हड़ताल से प्रदेश में 2000 से अधिक बसों के पहिए थम सकते है। हालांकि Roadways प्रशासन ने एजेंसी को दूसरे चालक लगाने के लिए निर्देश दे दिए है।
rajasthan Roadways प्रशासन Raksha Bandhan पर्व पर अधिक यात्री भार वाले रूटों पर अतिरिक्त बसों के संचालन की व्यवस्था कर रहा है। वहीं, रोडवेज में एजेंसी के जरिए नियुक्त 25 सौ चालकों ने अनिश्चिकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी है। इससे प्रदेश के 52 डिपो में बसों के पहिए थमने की स्थिति बन सकती है। राजस्थान रोडवेज संविदा चालक संघ ने मंगलवार से वेतन विसगंतियां समेत विभिन्न मांग लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। इसमें यदि एजेंसी ने दूसरे चालक समय पर उपलब्ध नहीं कराए तो दो हजार से अधिक बसों के पहिए थम सकते हैं। इससे त्यौहारी सीजन में यात्रियों को बड़ी परेशानी होगी। वहीं, रोडवेज की आय में भी नुकसान होगा।
- दूसरे चालक लगाने के निर्देश
Rajasthan State Road Transport Corporation ने प्रस्तावित हड़ताल देखते हुए एजेंसी को अन्य चालकों को लगाने के निर्देश दे दिए है। इसमें निगम के कार्यकारी निदेशक प्रशासन एम.पी. मीना ने सभी मुख्य प्रबधंकों को पत्र जारी किया। इसमें उन्होंने संस्था के चालकों के ड्यूटी से अनुपस्थित होने को अनुबंध शर्तों का उल्लंघन बताया। साथ ही दूसरे चालक उपलब्ध कराने की कार्यवाही के निर्देश दिए है। साथ ही अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस कार्यवाही भी लेवें।
- ठेकेदार की मनमर्जी, मनरेगा से कम भुगतान
राजस्थान रोडवेज संविदा चालक संघ के महासचिव राजेंद्र चौधरी ने बताया कि वर्ष 2006 से एजेंसी के जरिए 2500 से 3 हजार चालक कार्यरत है। चालक रोजाना 14-15 घंटे काम कर रहे है। बावजूद MNREGA श्रमिकों से भी कम 5837 रुपए ही मिलते है। इनमें से भी ठेकेदार मनमर्जी से कई बार राशि काटते है। चालकों को न तो ओवरटाइम मिलता ना ही कोई भत्ता। ऐसे में रोडवेज प्रशासन एजेंसी के बजाय स्वयं ही संविदा पर नियुक्त करें।
'उच्च न्यायालय के फैसले अनुसार अस्थाई चालकों को समान वेतन समान कार्य सैलेरी मिलनी चाहिए। सभी चालकों को प्रति माह सी.पी.एफ कटौती की रसीद दी जाए। चालकों का फैमिली पास और आई.डी कार्ड देंवे। चालकों को हटाया नहीं जाए।- महिमा सिंह सिद्धू, प्रदेश प्रधान, चालक संघ