19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुर

राजस्थान विश्वविद्यालय : राष्ट्रीय ​शिक्षा नीति के तहत तैयार किया सिलेबस

रोजगार के अवसरों से भरी होगी कॉमर्स की पढ़ाई, थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल भी जरूरी

Google source verification

जयपुर

image

Shipra Gupta

Aug 29, 2023

विजय शर्मा


जयपुर। राजस्थान यूनिवर्सिटी में बीकॉम में प्रवेश लेने वाले छात्रों को अब नए पैटर्न से पढ़ाई कराई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय ने यूजी प्रथम वर्ष के लिए तैयार किए सिलेबस में काफी बदलाव किए हैं। इसके तहत थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल पर भी जरूरी होगा। छात्रों को 50 फीसदी थ्योरी और 50 फीसदी प्रैक्टिकल की पढ़ाई कराई जाएगी। राज्य में कॉमर्स से छात्रों का रुझान घटता जा रहा है। स्कूल शिक्षा में जहां बच्चे कॉमर्स विषय चयन कर रहे हैं वहीं, कॉलेज शिक्षा में छात्रों का नामांकन कम हो रहा है।

बाजार मेंं जैसी डिमांड वैसा ही सिलेबस तैयार
कॉमर्स के क्षेत्र में नौकरियों के अवसरों को देखते हुए ही राजस्थान विश्वविद्यालय ने सिलेबस तैयार किया है। सिलेबस में हर पाठ्यक्रम की थ्योरी और प्रैक्टिकल को अलग-अलग तय किया है। चौथे सेमेस्टर में ऑनलाइन रिटर्न भरना सीखाया जाएगा। वहीं, कम्प्यूटर पर अकाउंट्स की जांच भी प्रैक्टिकल में शामिल है। इसीप्रकार जीएसटी को अनिवार्य पेपर के रूप में रखा है।

इसीलिए पड़ी जरूरत : 60 फीसदी बच्चे हो गए कम
राजस्थान में कॉमर्स के छात्रों का आंकड़ा गिर गया है। 2014 में 12 वीं राजस्थान बोर्ड में कॉमर्स में परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या 69,523 थी। 2023 में यह संख्या घटकर आधी से कम हो गई है। इस साल यह संख्या 29030 पर रह गई। यानी प्रदेश कॉमर्स के 60 फीसदी बच्चे कम हो गए।
इधर, राजस्थान विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने अध्ययन किया कि सिलेबस में प्रैक्टिकल नहीं होने के कारण बच्चों को रोजगार नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में नए सिलेबस में इसका ध्यान रखा गया है।

जानिए कैसा होगा नया सिलेबस
प्रथम सेमेस्टर : फाइनेंशियन अकाउंटिंग थ्योरी और लैब
दूसरा सेमेस्टर : बिजनेस स्टेटिस्टिक्स थ्योरी और लैब
तीसरा सेमेस्टर : कोस्ट अकाउंटिंग थ्योरी और लैब
चौथा सेमेस्टर : इनकम टैक्स लॉ एंड प्रैक्टिस थ्योरी और लैब
पांचवां सेमेस्टर : ऑडिटिंग थ्योरी और लैब
छठवां सेमेस्टर : गुड्स एंड सर्विस टेक्स (जीएसटी) थ्योरी और लैब


राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हिसाब से यह सिलेबस तैयार किया गया है। इसके लिए हमने कई कंपनियों से बात की है और बाजार में रोजगार के हालातों का अध्ययन किया है। उसी के अनुसार नए पाठ्यक्रम जोड़े हैं। थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल भी जरूरी रखा गया है।
प्रो. अशोक अग्रवाल संयोजक, बोर्ड ऑफ स्टडीज, लेखाशास्त्र एवं व्यवसायिक सांख्यिकी विभाग