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राजस्थान राज्य पाठय पुस्तक मंडल- जरूरत 322 करोड़ की लेकिन जेब में केवल 62 50 करोड़

राज्य सरकार से किसी भी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं लेने वाला राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल को अब पाठ्य पुस्तकें छपवाने के साथ अपने कार्मिकों के वेतन, पेंशन फंड आदि के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं बचा है।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Dec 02, 2022


Rakhi Hajela
राज्य सरकार से किसी भी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं लेने वाला राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल को अब पाठ्य पुस्तकें छपवाने के साथ अपने कार्मिकों के वेतन, पेंशन फंड आदि के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं बचा है। गौरतलब है कि निशुल्क पाठ्य पुस्तकों की योजना के तहत निदेशालय प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा की मांग के मुताबिक पाठ्य पुस्तकों की सप्लाई मंडल की ओर से राजस्थान के हर जिले के नोडल केंद्र पर की जाती है।
इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2022.23 में पहली से आठवीं कक्षा के विद्या र्थियों के लिए मंडल ने 2 23 करोड़ और नवीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए 17 करोड़पुस्तकें प्रकाशित करवाई थीं जिसका पैसा भी नहीं मिला है।
जरूरत है इतनी रकम की
पाठ्य पुस्तक मंडल को सुचारू रूप से चलाने के लिए वर्तमान में तकरीबन 322 करोड़ रुपए की जरूरत है। मंडल को पाठ्य पुस्तकों की प्रिंटिंग का पेपर खरीदने के लिए 200 करोड़, प्रिंटिंग पर होने वाले खर्च के लिए 50 करोड़, कर्मचारियों के वेतन के लिए 12 करोड़,, पेंशन फंड के लिए 40 करोड़ और अन्य खर्च के लिए 20 करोड़ रुपए की जरूरत है।

यह है पाठ्य पुस्तक मंडल की वित्तीय स्थिति
एफडीआर राशि- 30.50 करोड़ रुपए
चालू खाते की स्थिति- 18 करोड़रुपए
पीडी खाते की स्थिति -14 करोड़ रुपए
कुल- 62.50 करोड़ रुपए

पेंशन के लिए भी वित्त विभाग का इंकार
मंडल को वित्त विभाग ने कार्मिकों की पेंशन के लिए भी कोई राशि देने से इंकार कर दिया। वित्त विभाग ने लिखा कि पेंशन में होने वाले व्यय का भुगतान मंडल को अपने स्तर पर ही करना होगा।
इनका कहना है,
वित्त विभाग की ओर से जो निर्णय लिया गया है उसे लेकर शासी परिषद की बैठक हुई थी, हमने वित्त विभाग को िफर से लिखा है, अभी वहां से कोई जवाब हमें नहीं मिला है। वैसे भी मैंने कुछ समय पहले ही ज्वॉइन किया है सारा प्रकरण मेरे आने से पहले का है इसलिए मैं और कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं।
सियाराम मीणा, मुख्य लेखा अधिकारी
राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल

पुस्तक मंडल सरकार का ही एक भाग है। दोनों एक दूसरे से अलग नहीं हैं, अगर कहीं कोई समस्या आ भी रही है तो वह जल्द सुलझा ली जाएगी।
विनोद पुरोहित, सचिव
राजस्थान राज्य पुस्तक मंडल।