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रामगढ बांध स्थापना दिवस 30 दिसंबर को : कब लोगे सुध, कोई तो मेरा भी जन्म दिन मना लो…

रामगढ बाँध (ramgarh dam) का 30 दिसंबर को 124 वां स्थापना दिवस... ऐतिहासिक रामगढ बाँध की व्यथा... ऐतिहासिक रामगढ बाँध कुछ ऐसी ही व्यथा की कथा बनता जा रहा है। 30 दिसम्बर को यानी आज यह 124 वर्ष का हो जाएगा। अपनी स्थापना के 125 वें वर्ष मे प्रवेश करेगा।  

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रामगढ बांध स्थापना दिवस 30 दिसंबर को : कब लोगे सुध, कोई तो मेरा भी जन्म दिन मना लो...

रामगढ बांध स्थापना दिवस 30 दिसंबर को : कब लोगे सुध, कोई तो मेरा भी जन्म दिन मना लो...

जयपुर। ‘मुझे नही होना आधुनिक रूप से आबाद..., मुझे तो मेरे बीते हुए पुराने दिन ही लौटा दो। में तो मेरे वर्षों पुराने समय के अनुसार ही रहना चाहता हूँ, जब मेरी पाल पर चहल कदमी रहती थी। पशु पक्षियों का बसेरा रहता था। हर कोई मुझे निहारने आता था। मेरे चारों ओर हरियाली थी। मेरी नहर से सारा इलाक़ा सरसब्ज था...’ ऐतिहासिक रामगढ बाँध (ramgarh dam) कुछ ऐसी ही व्यथा की कथा बनता जा रहा है। 30 दिसम्बर को यानी आज यह 124 वर्ष का हो जाएगा। अपनी स्थापना के 125 वें वर्ष मे प्रवेश करेगा। दो दशक से रामगढ बाँध के अस्तित्व पर संकट आ खड़ा हुआ है। यह हरियाली व ख़ुशहाली के लिए नहीं, बल्कि बदहाली के लिए जाना जा रहा है। ऐसे में सबको सरसब्ज करके सबकी प्यास बुझाने वाला रामगढ बाँध (ramgarh dam) अपने जन्मदिन के उत्साह की बांट जो रहा है। कह रहा है, जैसे ‘कोई मेरा भी जन्म दिन मनालो’। पानी लाने की आवाज़ें भी चुनावी मौसम में ही सुनाई देती है। चुनाव ख़त्म होने के साथ ही आवाज लुप्त प्राय: हो जाती है। अब तो एक मात्र आसरा जनता जनार्दन ही है, उसे ही आगे आना होगा। वरना ऐतिहासिक विरासत को समेटे राजधानी जयपुर का यह सबसे बडा बांध (ramgarh dam) अतित का क़िस्सा बनकर रह जाएगा।

ज़िम्मेदारों ने बनायी दूरी
रामगढ बाँध (ramgarh dam) की देखरेख करने वाले सिंचाई व राजस्व महकमे ने यहाँ नदी नालों में अतिक्रमण की ज़ंजीरें डाल दी है। जगह जगह मेरे केचमेंट एरिया मे चेकडेम, एनीकट, तालाब, जोहड, तलाइया व जल सरंक्षण ढाँचे बनाकर मुझे मरणासन्न कर दिया है। इससे मेरा दम घुंट रहा है। अब तो विलायती बबूल की चुभन से मेरा हृदय (मुख्य भराव क्षेत्र) घायल हो गया है। विलायती बबूल ने मेरा प्राकृतिक सौंदर्य बर्बाद करके बदसूरत बना दिया है। विलायती बबूल हटने का नाम नही ले रहा है।

अब कब आएँगे विदेशी पावणे
सर्दियों के मौसम में मेरी पाल पर नाना प्रकार के देशी विदेशी पक्षियो का कलरव मन को आनंद देता था। यहाँ देशी ओर विदेशी पक्षियों का बसेरा मिलता था। हर सर्दी में विदेशी मेहमान रूस ओर साइबेरिया से आते रहे है। सर्दी जाने के बाद वापस अपने घर लौट जाते थे। जंगली जानवरों का मैं सदा ही प्रिय रहा हूँ। मगरमच्छ, कछुआ, घड़ियालों व नाना प्रकार की रंग बिरंगी मछलियों के लिए मशहूर रहा हूँ। अब तो जंगल वाले जानवर भी मेरे सूखने से मुझसे दूर हो चुके है। मेरी घाटी पानी,हरियाली व खिजूर के पेड़ों से लकदक थी। मगर अब खिजूर के पेड़ों पर आरी चल चुकी है। हज़ारों पेड़ सूखकर ज़मींदोज़ हो चुके हैं। पाल झाड़ियों व गंदगी में तब्दील हो चुकी है। मेरा वैभव खोता जा रहा है। मेरे खेवनहारों मुझे भी बचालो। वरना आपकी भी मुसीबतें बढ़ेगी।

ईआरसीपी सिर्फ काग़ज़ों में
रामगढ बाँध (ramgarh dam) में पानी लाने की योजना इस्ट राजस्थान केनाल प्रोजेक्ट (East Rajasthan Canal Project) यानी ईआरसीपी योजना काग़ज़ों से आगे नही बढ़ी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Cm ashok gehlot) प्रधानमंत्री को कई मर्तबा पत्र लिखकर साढ़े सैतिंस हज़ार करोड़ की इस योजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करके मंज़ूरी देने की माँग कर चुके है। राज्य मंत्रिपरिषद ने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भिजवाया है। राज्यसभा सांसद डॉ किरोड़ी लाल मीना (Rajya Sabha MP Dr. Kirori Lal Meena) बाँध में पानी लाने की माँग को लेकर आंदोलन कर चुके है। डा किरोड़ी लाल मीना, राज्यसभा सांसद ओम प्रकाश माथुर राज्यसभा में, जयपुर शहर सांसद राम चरण बोहरा व राजसमंद सांसद राजकुमारी दीया कुमारी व दौसा सांसद जसकौर मीना बाँध में पानी लाने का मामला लोकसभा में उठा चुके है। इसके बावजूद योजना राज्य व केंद्र के बीच सिर्फ काग़ज़ों में ही चल रही है। योजना की मंज़ूरी की राह ताकते ताकते धैर्य भी जवाब देने लगा है। मन करता है जाने बाँध में पानी आने की आस पुरी होगी की नही।


आरटीडीसी व खेलगाँव जर्जर
रामगढ बाँध (ramgarh dam) पर पर्यटकों की सुविधा के लिए राजस्थान पर्यटक विकास निगम ने झील ट्यूरिस्ट विलेज रेस्टोरेंट खोला था। जो वर्ष 2015 में बंद हो चुका है। बाँध पर भारतीय खेल प्राधीकरण की ओर से बनाया गया खेलगाँव भी जर्जर व बर्बाद हो चुका है। बाँध के आसपास अतिक्रमण हो चुका है।

रामगढ बाँध (ramgarh dam) एक नज़र में

रामगढ बाँध (ramgarh dam) की स्थापना जयपुर महाराजा माधोसिंह ने की थी

इसकी नींव 30 दिसम्बर 1897 को रखी गयी थी।

रामगढ बाँध (ramgarh dam) छह वर्ष में 1903 में बनकर हुआ था।
इसकी भराव क्षमता 65 फ़ीट है।

बाँध का केचमेंट एरिया 759 वर्ग किलोमीटर है।

बाँध में वर्तमान में 15 फ़ीट मिट्टी है।

इसके निर्माण में 584593 रूपए ख़र्च हुए थे।

बाँध से कालाखो दौसा का तक साढ़े 21 मील लम्बी मुख्य नहर व 139 मील लम्बी लिंक नहरो का निर्माण करवाया गया था।

मुख्य नहर चार दशक से बंद है।
बाँध से 1931 मे जयपुर की प्यास बुझाने के लिए पानी ले जाया गया।

इसमें कुल पानी की भराव क्षमता 75 मिलियन क्यूबिक मीटर है।

वर्ष 1981 में बाँध में एशियाई खेलो की नौकायन प्रतियोगिता आयोजित हुयी।

वर्ष 2005 से बाँध बिल्कुल सूखा है।


रामगढ बांध जयपुर की जीवन रेखा है। बांध में पानी लाने की योजना इआरसीपी को तुरंत मंज़ूर किया जाना चाहिए। अब तक योजना काग़ज़ों में ही चल रही है। दलगत राजनीति से परे हटकर ऐतिहासिक विरासत को बचाना हम सब की ज़िम्मेदारी है।

तुलसीदास चिंतामणि, सदस्य रामगढ बांध बचाओ संघर्ष समिति, जमवारामगढ

रामगढ बाँध के सरसब्ज होने से पीने को तथा कृषि के लिए पानी नसीब होने से कृषि में बेरोज़गारी ख़त्म होगी। राजधानी के पास अतिरिक्त पेयजल स्रोत हमेशा मौजूद रहेगा। योजना धरातल पर आनी चाहिए।

सांवर मल मीना, अध्यक्ष अखिल भारतीय किसान सभा व सदस्य रामगढ बाँध बचाओ संघर्ष समिति, जमवारामगढ