
Ranthbhor Tiger
Ranthambore Tigers Sanctuary: सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर बाघ परियोजना में ई-सर्विलांस सिस्टम होने के बाद भी बाघों के गायब होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि, वन विभाग की ओर से बाघों की मॉनिटरिंग व ट्रेकिंग के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत मेें रणथम्भौर में वन विभाग की नाक के नीचे से लगातार बाघ बाघिन लापता हो रहे हैं। बाघों के लगातार गायब होने के बाद भी अब तक वन विभाग की ओर से बाघों को ढूंढने में सफलता नहीं मिल सकी है। रणथम्भौर में बाघ टी-3, बाघिन टी-99 के दो शावक, टी-79 के शावक तो पहले ही ट्रेस नहीं हो पा रहे है। अब रणथम्भौर का एक और युवा बाघ टी-131 भी वन विभाग की नजरों से ओझल हो गया है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारी मामले में अब तक चुप्पी साध कर बैठे हुए हैं।
टी-93 की है संतान
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाघ टी-131 की उम्र करीब साढ़े तीन साल के आसपास है और यह बाघ बाघिन टी-93 का शावक है। बाघिन ने करीब ढाई साल पहले दो शावकों को जन्म दिया था। इन्हें वन विभाग की ओर से टी-130 व टी-131 नम्बर दिए गए थे। इसका मूवमेंट खण्डार रेंज के इण्डाला, जेड खोह, बालाजी टेंट, रावरा, कसेरा, देवकुई आदि वन क्षेत्र में रहता था।
नवम्बर 2022 के बाद नहीं आया नजर
वन विभाग की ओर से बाघ-बाघिनों की किस प्रकार की मॉनिटरिंग व ट्रेकिंग की जा रही है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वन विभाग की टीम को नवम्बर 2022 के बाद बाघ टी-131 के फोटो ट्रैप कैमरे तक प्राप्त नहीं है। आखिरी बार यह बाघ खण्डार रेंज में 30 नवम्बर 2022 को वन विभाग के फोटो ट्रैप कैमरे में कैद हुआ था। तब से लेकर आज तक वन विभाग को बाघ का कोई सुराग नहीं लग सका है। ऐसे में अब एक बार फिर से वन विभाग की मॉनिटरिंग व ट्रेकिंग के दावों की पोल खुल गई है और वन विभाग पर एक बार फिर से सवाल खड़े हो रहे हैं।
इनका कहना है...
बाघ टी-131 का मूवमेंट कई रेंज में रहता है। ऐसे में बाघ को लापता नहीं कहा जा सकता है। बाघ के लेटेस्ट फोटो कैमरा ट्रैप की जांच करने के बाद ही प्राप्त हो सकते हैं। बाघ किसी दूसरी रेंज में भी पहुंच सकता है।
विष्णु गुप्ता, क्षेत्रीय वनाधिकारी, रणथम्भौर बाघ परियोजना, खण्डार।
Published on:
05 May 2023 04:07 pm

बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
