
पहले मुश्किल लगा, फिर मिलाए हाथ.... मुहिम तो छेड़ दी, लेकिन पौधे कहां से आएं। फिर उन्हें पहाड़ पर कैसे पहुंचाएं। उनमें पानी कौन डाले। इसके लिए जाट ने अपसी सहयोगी संस्था और गांव के लोगों से मदद मांगी। लोगों ने सुना और समझा, लेकिन किसी को भी ये काम आसान नहीं लगा। ऐसे में जाट ने मालागिरी पर्वत से जुड़े गांवों में यात्रा निकाली। यात्रा पांच दिन चली। इसका नतीजा यह रहा कि उनके साथ हजारों हाथ जुड़ गए। भामाशाहों ने थोर, बरगद और पीपल के महंगे पौधे उपलब्ध करवाए, तो ग्रामीणों ने उन्हें रोपने में मदद की। औ
Published on:
23 Sept 2017 11:44 pm
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