प्रदेश में राइट टू हेल्थ बिल के विरोध (Right to Health Bill Protest) में रेजिडेंट और प्राइवेट हॉस्पिटल के 6 हजार डॉक्टर्स के साथ अब सेवारत चिकित्सक और मेडिकल टीचर्स भी हड़ताल पर चले गए। नतीजा पहले रेजिडेंट्स के कार्य बहिष्कार के कारण गड़बड़ाई हुई कार्य व्यवस्था और भी गड़बड़ा गईं। हालांकि अस्पताल अधीक्षक डॉ .अचल शर्मा सहित अन्य सीनियर डॉक्टर्स ने व्यवस्थाएं संभालने का प्रयास किया। वह खुद मरीजों के बीच पहुंचे और मरीजों को आश्वासन दिया।
बुधवार को एसएमएस हॉस्पिटल समेत प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में ऑपरेशन टाल दिए गए, मरीज स्ट्रेचर पर दर्द से कहराते रहे। ओपीडी में मरीजों की भीड़ लगी हुई थी, मरीज कतार में बैठ कर इंतजार करते हुए नजर आए कि कब कोई डॉक्टर आएगा और उन्हें देखेगा। इस बीच कई मरीज तो बिना इलाज के लौट गए तो कई गंभीर मरीजों को दूसरे चिकित्सकों से परामर्श के लिए दो से तीन घंटे कतार में गुजारने पड़े। उन्हें काफी परेशानी हुई।सबसे ज्यादा परेशानी एसएमएस अस्पताल के धनवंतरि ब्लॉक में देखी गई। यहां मेडिसिन, सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी समेत अन्य विभागों की ओपीडी में भीड़ रही। मरीज इलाज की उम्मीद में आए थे लेकिन वह अस्पताल आकर और भी अधिक परेशान देखे गए।
केस एक
झुंझुनू से खुद को दिखाने के लिए आए एक मरीज का कहना वह इससे पहले तीन बार चक्कर काट चुके हैं लेकिन देखने वाला कोई नहीं। पर्ची कट चुकी है लेकिन आज भी इलाज मिलेगा या नहीं ये पता नहीं है। कोई कुछ बताने वाला भी नहीं है।
केस दो खाटू श्याम जी से आए रामवतार नाई ने बताया कि वह अपने पिता की सोनोग्राफी रिपोर्ट दिखाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। उन्हें फोर्थ स्टेज का कैंसर है लेकिन कोई देखने वाला नहीं। सरकार को डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए उनकी वजह से आम आदमी परेशान हो रहा है।
केस 3
पिछले चार दिन से एसएमएस अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने के लिए आए एक अन्य मरीज ने कहा कि सुबह छह बजे से वह यहां लाइन में लगे हुए हैं लेकिन डॉक्टर से मिलना ही नहीं हो पा रहा।
केस चार
जब डॉक्टर ही नहीं देखेंगे तो मरीज भला कहा जाएंगे,यह कहना था एक महिल मरीज का जो खुद को दिखाने के लिए पिछले दो दिन से एसएमएस अस्पताल में चक्कर काट रही है, उन्होंने कहा कि यहां केवल एक ही डॉक्टर बैठे हुए हैं और मरीजों की संख्या कहीं अधिक है। कल आई थी लेकिन वापस जाना पडा आज भी ऐसा ही हाल है।