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जयपुर

लोग बेहाल…न पीने को पानी मिल रहा, सडक़ का भी इंतजार

कहने को तो सांगानेर राजधानी का हिस्सा है, लेकिन यहां लोग मूलभूत सुविधाओं से लिए परेशान हैं। सैकड़ों कॉलोनियों को पेयजल की जरूरत है। सीवर लाइन भी नहीं है। मानसून में जलभराव से आना-जाना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोग तो जलभराव की वजह से दूसरी जगह शिफ्ट हो गए।

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जयपुर। सांगानेर श्योपुर रोड के आस-पास की कॉलोनियों में लोगों को पानी खरीदना पड़ रहा है। इन लोगों की मानें तो हर माह 2500 से लेकर तीन हजार तो पानी के टैंकर खरीदने में ही चले जाते हैं। मानसून के दिनों में पानी घर के बाहर जमा हो जाता है, निकासी का कोई इंतजाम नहीं है।


मई में विधायक ने दिया था धरना
विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य न होने से विधायक अशोक लाहोटी ने जेडीए में आकर धरना दिया था। सडक़ों का निर्माण कार्य, रोड कट को दुरुस्त करने से लेकर कॉलोनियों में नियमन शिविर न लगाने के मुद्दे उठाए थे। लेकिन, जेडीए ने इनमें से एक पर भी गंभीरता के साथ काम शुरू नहीं किया है। मानसून से पहले जेडीए ने पेचवर्क का काम जरूर करवाया है।

पानी की किल्लत है। एक घंटे का दावा जलदाय विभाग करता है, लेकिन पानी 15 मिनट ही आता है। निजी टैंकरों के भरोसे हजारों की आबादी है। सरकारी टैंकर आते नहीं है।
-सुधीर वाल्मीकि, तुलसी नगर

बरसात होने के बाद सडक़ पर पानी भर जाता है। कई दिनों तक निकलता नहीं है। सडक़ न होने से आने जाने में दिक्कत होती है। शिकायत का भी किसी पर कोई असर नहीं होता।
-कोमल, तिरुपति बाला जी नगर

40 वर्ष से रह रहा हूं। सडक़ों के काम आज तक नहीं हुए। पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। बारिश हो जाए तो सडक़ पर निकलना मुश्किल हो जाता है।
-प्रभु लाल सैनी, बैरवा कॉलोनी

महीने में आठ टैंकर मंगवाने के बाद पानी की जरूरत पूरी होती है। कॉलोनी की सडक़ें बारिशत में तालाब का रूप ले लेती हैं। लोग परेशान हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।
-अविनाश शर्मा, सियाराम कॉलोनी