
भारत की आत्मा और विवेक की वाणी है संस्कृत- राज्यपाल कलराज मिश्र
जयपुर
संस्कृत भाषा भारत की आत्मा ओर विवेक की वाणी हैं । यह संस्कृति का सेतुबंध है यदि हमें भारत के वास्तविक स्वरूप को जानना हैं तो संस्कृत का अध्ययन बहुत जरूरी है। ऐसा कहना है राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र का । मौका था राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान जयपुर परिसर में सोमवार को बहुउददेशीय भवन के शिलान्यास कार्यक्रम का। जिसमें राज्यपाल कलराज मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां और जयपुर शहर सांसद रामचरण बौहरा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्यपाल कलराज मिश्र ने विधिवत रूप से आधारशिला रख और पट्टिका का अनावरण कर शिलान्यास किया।
समारोह में राज्यपाल ने अपने उदबोधन में कहा- कि संस्कृत भारत की आत्मा और विवेक की वाणी है। यदि हमें भारत के वास्तविक स्वरूप को जानना है तो संस्कृत का अध्ययन बहुत जरूरी है। क्योंकि भारतीय ज्ञान, विज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक आधार यही भाषा है। आज पूरा विश्व भौतिकवाद और अशांति से त्रस्त हैं। ऐसे समय में संस्कृत के स्त्रातकों का उत्तरदायित्व है, कि वे शांति समन्वय का संदेश संपूर्ण विश्व में प्रसारित करें। कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने संस्कृत में अपने कहा कि मैं अपने जीवन में संस्कृत की मधुरता का विशेष प्रशंसक हूं। छोटीकाशी जयपुर में संस्कृत अध्यापन की परंपरा का होना सुखदेव योग और संस्कृत बहुत जरूरी है। वहीं सांसद रामचरण बोहरा ने कहा कि संस्कृत भारतीय नहीं अपितु संपूर्ण विश्व की प्राचीनतम व सर्वाधिक विकसित भाषा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के कुलपति प्रोफेसर परमेश् वर नारायण शास्त्री और जयपुर परिसर के प्राचार्य प्रोफेसर अर्कनाथ चौधरी ने राज्यपाल को विशिष्ट अभिनंदन पत्र समर्पित कर सम्मानित भी किया। समारोह में प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने परिसर की विविध गतिविधियों और नवीन भवन की संकल्पना पर प्रकाश डाला।
Updated on:
27 Jan 2020, 6:21 PM IST
Published on:
27 Jan 2020, 6:21 PM IST
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