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ईटिंग हैबिट्स सुधार रहे स्कूल, ब्रेकफास्ट-लंच स्कूल में ही कर रहे सर्व

Jaipur School News: स्कूलों में बच्चों के लिए खाने की आदतें सुधारने के लिए कई तरीकों को अपनाया जा रहा है।

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जयपुर

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Alfiya Khan

Feb 01, 2025

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विजय शर्मा
जयपुर। छोटे बच्चों में ईटिंग हैबिट्स सुधारने के लिए स्कूल कवायद कर रहे हैं। प्ले स्कूलों की ओर से छोटे बच्चों के शारीरिक विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। यहां बच्चों को ब्रेकफास्ट से लेकर लंच तक दिया जा रहा है। पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के मील पर विशेष फोकस किया जा रहा है। बच्चे सिर्फ स्कूल बैग लेकर आ रहे हैं और स्कूल अपने स्तर पर हेल्दी फूड सर्व कर रहे हैं।

दरअसल, छोटे बच्चों में खाने की आदत नहीं होती। अभिभावक बच्चों की इस आदत को लेकर परेशान रहते हैं। इसके लिए प्ले स्कूलों की ओर से बच्चों की इस आदत को सुधारा जा रहा है। स्कूलों की ओर से ब्रेकफास्ट और लंच तो दिया जा रहा है वहीं, डिनर का चार्ट भी अभिभावकों को भेजा जा रहा है।

कार्टून पात्रों से बता रहे महत्व

प्ले स्कूलों में बच्चों के लिए खाने की आदतें सुधारने के लिए कई तरीकों को अपनाया जा रहा है। बच्चों को खाने के दौरान उनके पसंदीदा कार्टून पात्रों के माध्यम से हेल्दी फूड के महत्व को समझाया जा रहा है। कई स्कूलों में बच्चों के बीच आहार से संबंधित खेल, चित्रकला और कहानियां सुनाने जैसी गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जिससे बच्चों में अच्छे भोजन की आदतें विकसित की जा रही हैं।

ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है हेल्दी फूड

बाल रोग विशेषज्ञ जगदीश सिंह के अनुसार ब्रेकफास्ट को दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। यह बच्चे की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है और पूरे दिन के कार्यों के लिए मानसिक और शारीरिक ताकत प्रदान करता है। लेकिन देखा गया कि बच्चे अक्सर ब्रेकफास्ट छोड़ देते हैं या फिर जंक फूड का सेवन करते हैं, जो हानिकारक है। अगर स्कूलों में नाश्ते की व्यवस्था से बच्चों में स्वस्थ खाने की आदतें विकसित हो रही हैं तो बच्चों की सेहत के लिए लाभकारी है। बच्चों को लंच में हरी सब्जियां, फल, दाल-चावल, रोटियां व अन्य पौष्टिक पदार्थ दिए जा सकते हैं।

शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी

बच्चों की ईटिंग हैबिट्स को सुधारने के लिए स्कूलों की ओर से किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। इस प्रक्रिया में बच्चों को पौष्टिक आहार की आदतें सिखाई जा रही हैं, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जरूरी हैं। यदि यह बदलाव लंबे समय तक बनाए रखे जाते हैं तो आने वाले वर्षों में बच्चों की सेहत में सुधार देखने को मिलेगा और वे एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकेंगे।
-डॉ. केके यादव, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ

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