
कोरानाकाल के बाद भले ही शिक्षा डिजिटल मोड पर आ गई है, लेकिन इसके दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। बच्चों की सुविधा के लिए स्कूलों ने ऑनलाइन मोड पर अभिभावकों और बच्चों से संवाद शुरू किया, लेकिन स्कूलों ने इसके आदत बना लिया। इसका नतीजा यह हुआ है कि बच्चे मोबाइल के और करीब आ गए हैं। हालत यह है कि स्कूल अब होमवर्क से लेकर अन्य सभी सूचनाएं सोशल मीडिया ग्रुप्स पर ही साझा कर रहे हैं। इससे कम उम्र में ही मोबाइल की लत लग गई हैं। घरों में छोटे बच्चों को अभिभावकों ने मजबूरन मोबाइल दिला दिया है। इसका खमियाजा अभिभावकों को भी उठाना पड़ रहा है। बच्चे मोबाइल का अधिक उपयोग कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ सोशल मीडिया के भी आदि हो गए हैं।
स्कूल डायरी का उपयोग नहीं
बड़े निजी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा हावी हो गई है। स्कूल और अभिभावकों का ऑफलाइन संवाद खत्म हो गया है। निजी स्कूलों की ओर से प्रवेश के दौरान 300 रुपए तक की डायरी खरीदने के लिए मजबूर तो किया जाता है, लेकिन डिजिटल दौर में उस डायरी का स्कूल ही उपयोग नहीं कर रहे हैं। इससे बच्चों की रचनात्मकता भी खत्म हो रही है। मोटी फीस देने के बाद भी स्कूल बच्चों को
सरकारी स्कूलों में पैटर्न पुराना ही
शहर में एक ओर जहां निजी स्कूल मोबाइल उपयोग करने पर दबाव बना रहे हैं। वहीं सरकारी स्कूल पुराने पैटर्न पर ही चल रहे हैं। स्कूलों में होमपर्क ऑफलाइन ही दिया जा रहा है। इसके अलावा अभिभावक और शिक्षकों के बीच संवाद भी ऑफलाइन है। शिक्षक बच्चे का और अभिभावक बच्चों की पढाई से अपटेड रहते हैं।
बच्चों का पढाई से ध्यान भटक जाता
एक वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार शिक्षक क्लास ग्रुप्स बनाकर उसमें होमवर्क असाइन कर देते हैं। इससे उनका तो कार्य आसान हो जाता है, लेकिन बच्चों का पढाई से ध्यान भटक जाता है। ग्रुप असाइनमेंट में वे की कई बार दोस्तों से कांफ्रेंस कॉल पर बात करने लग जाते हैं ये फिर बीच -बीच में सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं । इस कारण होमवर्क में ध्यान नहीं लगता। बच्चों की रचनात्मकता भी खत्म हो रही हैं।
मोबाइल लत बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भारी है। बच्चों को रोज दो घंटे तो मोबाइल के साथ निकाल रहे हैं।
रिपोर्ट और फैक्ट फाइल
- 90 फीसदी युवाओं के घर स्मार्टफोन, दो तिहाई ही करते डिजिटल पढ़ाई
- असर 2023-बियॉन्ड बेसिक्स रिपोर्ट : 80 फीसदी युवा स्मार्टफोन का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए कर रहे
- दो-तिहाई ही पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे
- 43.7 फीसदी लड़कों के पास स्वयं का स्मार्टफोन
- 90 फीसदी युवाओं के घर में स्मार्टफोन
- 19.8 फीसदी लड़कियां और 43.7 फीसदी लड़कों के पास स्वयं का स्मार्टफोन
- 90.5 फीसदी युवाओं ने सर्वे से पिछले सप्ताह में सोशल मीडिया का प्रयोग किया
- 87.8 फीसदी लड़कियों की तुलना में 93.4 फीसदी लड़के कर रहे सोशल मीडिया का प्रयोग
- सोशल मीडिया का प्रयोग करने वाले सभी युवाओं में से आधे ही सुरक्षा सेटिंग्स के बारे में जानते
---
अभिभावक हर समय नजर नहीं रख सकते। स्कूलों को होमवर्क पैटर्न में बदलाव करने चाहिए। निजी स्कूलों की ओर से मोटी फीस भी ली जाती हैं। बच्चों का हर तरह से विकास जरूरी है। मोबाइल की लत लगने से बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों मेें भी शिक्षक बच्चों को होमवर्क नोट कराता है।
राजेन्द्र हंस, पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी
Published on:
26 Dec 2024 06:08 pm

बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
