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‘शाला सिद्धि’ से पता चलेगी स्कूलों की हकीकत

स्कूलों को देना होगा अपना पूरा ब्यौरास्कूल खुद कर सकेंगे अपना मूल्यांकन

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Aug 20, 2021

'शाला सिद्धि' से पता चलेगी स्कूलों की हकीकत

'शाला सिद्धि' से पता चलेगी स्कूलों की हकीकत


Rakhi Hajela
जयपुर, 20 अगस्त
प्रदेश के सरकारी स्कूलों (Govt. Schools) की हकीकत अब 'शाला सिद्धि' (Shala siddhi) से पता चलेगी। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान नीपा (National Institute of Educational Planning and Administration) की ओर से विकसित किए गए राष्ट्रीय स्कूल मानक और मूल्यांकन कार्यक्रम 'शाला सिद्धि' कार्यक्रम (National School Standards and Assessment Program 'Shala Siddhi' Program) के तहत स्कूलों को शिक्षकों और बच्चों को पूरा ब्यौरा देना होगा। इसमें बताया जाएगा कि किस बच्चे की पढ़ाई किस स्तर की है, स्कूल में पढ़ाई का स्तर क्या है? शिक्षक बच्चों को किस प्रकार से पढ़ाई करवा रहे हैं। विद्याथियों का नामांकन क्या है और स्कूल में शिक्षकों की संख्या कितनी है ? कितने पुरुष और कितनी महिला शिक्षक है ? इसका ब्यौरा भी दिया जाएगा। शिक्षकों का प्रोफाइल भी इस कार्यक्रम के तहत तैयार किया जाएगा और सारी जानकारी शाला सिद्धि में संस्था प्रधानों को 30 सितंबर तक देनी होगी।
ग्रेड ए से ई तक की होगी श्रेणी
शाला सिद्धि में बच्चों के लिए ग्रेड ए से ई तक की कैटेगरी बनाई है। 81 से 100 फीसदी प्राप्तांक वाले ए ग्रेड, 61 से 80 प्राप्तांक वाले बी ग्रेड, 41 से 60 प्राप्तांक वाले सी ग्रेड, 33 से 40 प्राप्तांक वाले डी ग्रेड और 0 से 32 प्राप्तांक करने वाले बच्चों को ग्रेड ई में रखने का प्रावधान इसमें दिया गया है। हालांकि इस बार कोविड के कारण
बच्चों को बिना परीक्षा लिए पास कर दिया गया है ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान समय समय लिए गए टेस्ट के आधार पर विद्यार्थियों को इसमें ग्रेड दी जाएगी। इसके अलावा खेल का मैदान, खेल सामग्री, कक्षा कक्षए, विद्युत उपकरण, पुस्तकालय, शौचालय आदि का ब्यौरा भी देना होगा। शिक्षकों के सुझाव, उनका शैक्षणिक ब्यौरा इसमें दिया जाएगा। स्कूलों में महिला और पुरुष शिक्षकों की संख्या की जानकारी देनी होगी।
सेल्फ असेसमेंट का तरीका है शाला सिद्धि
गौरतलब है कि शाला सिद्धि के जरिए स्कूलों को सेल्फ असेसमेंट करने का अवसर दिया जाता है। जिसमें ना सिर्फ संस्था प्रधान बल्कि विभागीय अधिकारी भी स्कूलों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा।
गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से शाला सिद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिसके तहत चयनित सरकारी स्कूलों के साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए वार्षिक कार्य योजना बजट प्रस्तावित किया गया है। इसमें विद्यालय का मूल्यांकन दो स्तर से किया जाएगा। प्रथम स्तर पर स्वमूल्यांकन होगा, जो विद्यालय के शिक्षक करेंगे। इसमें निर्धारित प्रारूप पर सूचनाएं भरी जाएंगी और इनकी एक कॉपी स्कूलों को खुद अपने पास भी रखनी होगी। इन सूचनाओं को आनलाइन वेब पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। जिसके लिए हर स्कूल की एक आईडी और पासवर्ड बनाया जाएगा जिससे स्कूल उसी पर पूरी जानकारी फीड कर सकें और उनमें कोई भी बाहरी हस्तक्षेप नहीं हो। स्कूलों का मूल्यांकन संस्था के रूप में होगा। जिसमें सभी गतिविधियों को शामिल करते हुए उनकी ग्रेडिंग की जाएगी, जिस स्कूल का मूल्यांकन किया जाएगा उसको स्कूल के डैश बोर्ड पर भी प्रदर्शित किया जाएगा।


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