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Shanichari amavasya: सर्वार्थ सिद्धि-धृति योग में बड़ पूजन-शनिश्चरी अमावस्या

जयपुर. वट सावित्री अमावस्या एवं शनि जयंती इस बार 6 जून को मनाई जाएगी। इस दिन गुरुवार, सर्वार्थ सिद्धि-धृति योग, राेहिणी नक्षत्र, वृष राशि में उच्च का सूर्य व चंद्रमा जेष्ठ का महीना व अमावस्या तिथि रहेगी। इस दिन जहां सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट का पूजन कर वट सावित्री का […]

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प्राचीन शनि मंदिर के स्थापना दिवस पर शहर के मंदिरों में विशेष आयोजन, शनिदेव का किया तेलाभिषेक

जयपुर. वट सावित्री अमावस्या एवं शनि जयंती इस बार 6 जून को मनाई जाएगी। इस दिन गुरुवार, सर्वार्थ सिद्धि-धृति योग, राेहिणी नक्षत्र, वृष राशि में उच्च का सूर्य व चंद्रमा जेष्ठ का महीना व अमावस्या तिथि रहेगी। इस दिन जहां सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट का पूजन कर वट सावित्री का व्रत रखेंगी और कथा का श्रवण करेंगी। वहीं शहर के शनि मंदिरों में तेलाभिषेक समेत कई विशेष आयोजन होंगे। शनि की कृपा पाने के लिए भक्त विशेष पूजा-आराधना करेंगे। ऐसा माना जाता है कि जब शनि प्रसन्न होते हैं तो किसी भी व्यक्ति को किसी भी काम में सफलता में देर नहीं लगती। वहीं जब शनि की टेढ़ी नजर होती है तब वह किसी भी कार्य को विफल कर देते है और राजा से रंक बनाने में भी देर नहीं करते।

शनि से जनित दोषों से मिलेगी मुक्ति

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री के अनुसार जिन राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती अथवा शनि की ढैया का बुरा प्रभाव है और जिनका राहु व केतू खराब है, कालसर्प योग व पितृदोष हैं। ऐसे जातक इस दिन शनिदेव को प्रसन्न कर शनि से जनित सभी दोषों से छुटकारा प्राप्त कर सकते हैं। सर्वार्थ सिद्धि व धृति योग में भगवान शनि की पूजा अधिक फलदायक रहेगी। शनि एक ऐसे देवता हैं जो धीमी गति से चलते हैं। धीमी गति से चलने के कारण इनका नाम शनैश्चर पड़ा। शनि एक राशि में ढाई वर्ष रहते हैं, 30 वर्ष बाद शनि की साढ़ेसाती व्यक्ति पर प्रारंभ होती है। अधिक से अधिक किसी व्यक्ति के जीवन में दो बार शनि की साढ़ेसाती आ सकती है। जब शनि गोचर से राशि में होते हैं तब शनि की साढ़ेसाती प्रारंभ होती है। यह कुल साढ़े सात वर्ष तक रहती है और जब शनि चतुर्थ और अष्टम स्थान गोचर करत हैं तब शनि की ढैया रहती है, जो ढाई वर्ष तक रहती है और बहुत ही कष्टकारी भी होती है।

पितृदोष से मुक्ति के लिए

भगवान शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि अमावस्या के दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार गरीबों को अन्न और धन का दान करें। माना जाता है कि इस उपाय को करने से पितरों का आशीर्वाद बना रहता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।