
शीतलाष्टमी (बास्योड़ा) का लोकपर्व
Sheetala Ashtami 2023 : शीतलाष्टमी (बास्योड़ा) का लोकपर्व बुधवार को जाएगा। वहीं, रांधा पुआ के तहत मंगलवार को दोपहर बाद से घरों में पकवान बनाए जाएंगे। अगले दिन महिलाएं शीतला माता को मूंग, मोठ, चने, पुआ-पकौड़ी, दही, राबड़ी सहित अन्य ठंडे पकवानों का भोग लगाएंगी। साथ ही पूजा अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करेंगी। वहीं, लोग ठंडे पकवान ही खाएंगे।
चाकसू में शील की डूंगरी स्थित शीतला माता मंदिर में मंगलवार से दो दिवसीय मेले की शुरुआत होगी। ढूंढाढ की परंपरा के अनुसार यह पर्व ठंडे वार को ही मनाया जाता है। राजधानी में असमंजस के चलते सोमवार को महिलाओं ने ठंडे पकवानों का भोग लगाकर शीतला माता की पूजा अर्चना की। बाजारों में मिट्टी के बर्तन और अन्य पूजन सामग्री खरीदी गई।
मिलती है रोगों से मुक्ति
ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि मान्यता है कि शीतलाष्टमी के व्रत को करने से कई तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है। शीतला मां के पूजन से चेचक, खसरा, बड़ी माता, छोटी माता जैसी बीमारियां नहीं होती। शीतला अष्टमी के बाद से ही ग्रीष्मकाल का आरंभ हो जाता है। अत: शीतला माता के स्वरूप को शीतलता प्रदान करने वाला माना जाता है।
धार्मिक-वैज्ञानिक महत्व
ज्योतिषाचार्य पं.मुकेश पारीक व पं. निलेश शास्त्री ने बताया कि शीतलाष्टमी को ठंडा भोजन खाने के पीछे धार्मिक-वैज्ञानिक महत्व है। माता शीतला ठंडे व्यंजन और जल से मां शीतला प्रसन्न होती है और श्रद्धालुओं को निरोग होने का वरदान देती है। नेत्र संबंधी रोगों को दूर करने के लिए विशेष महत्व है।
Published on:
14 Mar 2023 10:16 am
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