कसूर भी सिर्फ इतना कि शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाने के लिए तैयार होते समय बच्चा मां की गोद से गिर गया और सिर पर चोट आ गई। सात दिन आईसीयू में इलाज के बाद शिशु स्वस्थ हो गया, लेकिन वहां के कानून ने माता-पिता पर शेकिंग बेबी सिंड्रोम धारा लगा दी। सिरसी रोड निवासी अभिषेक पारीक ने बताया कि उनका छोटा भाई आशीष पारीक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में प्रोजेक्ट मैनेजर है।
वह 10 अगस्त 2015 को गर्भवती पत्नी के साथ न्यू जर्सी (अमरीका) गया था। वहां उसकी पत्नी विदिशा ने गत 21 अक्टूबर को पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम अश्विद रखा गया। बच्चे के गोद से गिरने के बाद वहां का कानून एेसा आड़े आया कि दस दिनों से उसे मां का दूध भी नसीब हुआ और मां को कुछ देर के लिए ही मिलने दिया जा रहा है। वहीं यहां अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मानो ईश्वर रूठ गया हो
शिशु के गिरने के तुरंत बाद उसके माता-पिता ने उसे जर्सी सिटी स्थित निजी अस्पताल की आपातकालीन इकाई में दिखाया। वहां से उसे दूसरे अस्पताल स्थानांतरित कर दिया। बस दंपती के लिए यहीं से सब कुछ बदल गया। इस अस्पताल के डॉक्टर डिपार्टमेंट ऑफ चाइल्ड प्रोटेक्शन एंड परमानेंसी (डीसीपीपी) से जुड़े थे और उन पर बाल अपराध का संदेह कर लिया।
चाइल्ड सोसायटी के जरिये लिया बच्चा
बच्चे के जयपुर निवासी ताऊ अभिषेक ने बताया कि अमरीका की चाइल्ड केयर सोसायटी ने वहां की पुलिस के माध्यम से माता-पिता पर शेकिंग बेबी सिंड्रोम धारा लगा दी। इसके बाद शिशु को फोस्टर पेरेंट्स (वहां बच्चे को रखने वाले लाइसेंस धारी माता-पिता) को सौंप दिया गया। सरकार की ओर से इन माता-पिता को बच्चों को रखने के एवज में बाकायदा वेतन दिया जाता है।
विदेश मंत्री और पीएमओ तक गुहार
आशीष ने अमरीका में ही अदालत का दरवाजा खटखटाया है। चार जनवरी को हुई सुनवाई में उन्होंने अपना पक्ष रखा। अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भारतीय दूतावास को भी ई-मेल के जरिये आठ जनवरी को सूचना दे दी गई। इसके चार दिन बाद दूरभाष के जरिए भारतीय दूतावास से आशीष को मदद का भरोसा दिलाया है।