विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पार्टियां अब दिन-रात जुट गईं हैं। इस बार राजनीतिक दल किसी प्रकार का कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। यही कारण है कि प्रत्याशियों के चयन के लिए तेजी से सर्वे हो रहे हैं। भाजपा भी तेजी से जुटी है। प्रांतीय टीम गोपनीय रूप से सर्वे कर रही है। यह वार्डों से लेकर गांवों तक पहुंच रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की रिपोर्ट भी अपना काम करेगी।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पार्टियां अब दिन-रात जुट गईं हैं। इस बार राजनीतिक दल किसी प्रकार का कोई रिस्क नहीं लेना चाहते। यही कारण है कि प्रत्याशियों के चयन के लिए तेजी से सर्वे हो रहे हैं। भाजपा भी तेजी से जुटी है। प्रांतीय टीम गोपनीय रूप से सर्वे कर रही है। यह वार्डों से लेकर गांवों तक पहुंच रही है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की रिपोर्ट भी अपना काम करेगी।
जानकारों का कहना है कि उसी प्रत्याशी के नाम पर इस बार मुहर लगेगी जो जनता के नजदीक हो और सामाजिक वैल्यू अच्छी रखता हो। जिले की 11 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का अधिक दबदबा है। भाजपा के हाथ में शहर व मुंडावर विधानसभा है। जानकारों का कहना है कि प्रदेश की सत्ता की चाबी अलवर व आसपास के जनपदों के पास है। यहां जिस दल के विधायक सर्वाधिक जीतते हैं उन्हीं की सरकार बनती है। ऐसे में इस क्षेत्र
पर राजनीतिक दलों का अधिक ध्यान है। भाजपा प्रत्याशियों की खोज में इस बार जल्दबाजी नहीं करेगी। यदि फिर से प्रत्याशी चयन में गलती हुई तो उसे सुधार का मौका नहीं मिलेगा। ऐसे में सर्वे की रिपोर्ट के अलावा प्रत्याशी चयन में संघ, सांसद, स्थानीय नेताओं की रिपोर्ट भी काम करेगी। उधर, कांग्रेस, बसपा, आप भी किसी मायने में कम नहीं हैं। वह भी तैयारियों में जुटी हैं।
लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी इसी के साथ
भाजपा विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा चुनाव के लिए भी जमीन तैयार कर रही है। इस बार जैसे ही नवंबर में विधानसभा चुनाव होंगे। उसके कुछ माह बाद वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव होंगे। ऐसे में दोगुनी मेहनत न करनी पड़ी, इसलिए विधानसभा चुनाव में ही सीट पक्की करने की तैयारी है।