
सर्विस टैक्स के जमाने से ही स्वास्थ्य रक्षक यानि हैल्थकेयर सेवाएं टैक्स के दायरे से दूर रखी गई हैं। जीएसटी में भी हैल्थकेयर सेवाएं शुरुआत से ही करमुक्त हैं। हैल्थकेयर सेवाएं परिभाषित भी हैं, जो किसी हॉस्पिटल, क्लिनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, नर्सिंग होम द्वारा दी जाए। ये हैल्थकेयर सेवाएं किसी भी रिकॉग्नाइज्ड चिकित्सा पद्धति जैसे आयुर्वेद, एलोपैथी, होम्योपैथी, यूनानी, फिजियोथेरेपी में ट्रीटमेंट या ऑपरेशन के माध्यम से प्रदाय हो सकती हैं।
किसी अंग प्रत्यंग अथवा हड्डी के टूटने या क्षत् विक्षत होने पर उसको सामान्य स्थिति में लाने, किसी दुर्घटना आदि में शरीर को पहुंची चोट को ठीक करने और प्रेग्नेंसी सहित अन्य स्वास्थ्य सेवाओं पर टैक्स नहीं लगता। अत: यह स्पष्ट है कि स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए किए जाने वाले उपचार हैल्थकेयर सर्विसेज में आएंगे। अगर बाहर के डॉक्टर्स की सेवाएं ली जाती हैं तो ये सेवाएं भी हैल्थ केयर सेवाएं ही हैं। अत: करमुक्त हैं।
इलाज के दौरान रोगी को दी जाने वाली सुविधाएं करमुक्त होती हैं जैसे दवाएं, इंजेक्शन, टेस्ट, नर्सिंग केयर, पेशेंट डाइट, आइसीयू, एनआइसीयू, आइसीसीयू के खर्चे आदि। लेकिन यदि मरीज या उसके परिजन अस्पताल के ओपीडी में आकर खानपान करते हैं तो उन्हें जीएसटी देना होगा।
प्राइवेट रूम के किराए पर जीएसटी लगेगा। यदि उसका एक दिन का किराया 5 हजार रुपए से ज्यादा है व उसे अलग से वसूला गया है तो जीएसटी लगेगा। यदि पैकेज में शामिल है तो नहीं लगेगा। अगर अस्पताल की खुद की दवा की दुकान है जहां से नॉन पेशेंट के लिए भी दवा आदि बेची जाती है तो जीएसटी लगेगा।
ब्यूटी या आकर्षण के लिए ट्रीटमेंट या किसी अंग को आकर्षक बनाने के लिए किए जाने वाले कोई भी ट्रीटमेंट या ऑपरेशन हैल्थ केयर सर्विसेज में नहीं आते हैं। जो सौंदर्यवर्धन में आते हैं, उन पर टैक्स लगता है। जैसे प्लास्टिक सर्जरी, हेयर ट्रांसप्लांट, टैटू आदि। हैल्थ ट्रीटमेंट ही करमुक्त है न कि ब्यूटी ट्रीटमेंट।
Published on:
08 Sept 2024 06:14 pm

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