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पत्रिका कार्यालय में औद्योगिक विकास विषय पर की-नोट कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही ये बड़ी बातें?

Keynote Program : लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के बीच रविवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में औद्योगिक विकास विषय पर की-नोट कार्यक्रम हुआ। वक्ताओं के साथ उद्योगों और व्यापारिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने व्यापार व लघु उद्योगों के विकास पर विचार रखे।

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Patrika Keynote Program : लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के बीच रविवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में औद्योगिक विकास विषय पर की-नोट कार्यक्रम हुआ। वक्ताओं के साथ उद्योगों और व्यापारिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने व्यापार व लघु उद्योगों के विकास पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि लघु, कुटीर एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को प्रयास करने चाहिए। दोनों सरकारें मिलकर काम करें तो देश का भी विकास होगा और आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तो रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होगा तो निवेश भी आएगा

भारतीय उद्योग परिसंघ संगठन (सीआईआई) राजस्थान के पूर्व चेयरमैन अभिनव बांठिया ने कहा कि चाहे कोई भी सरकार आए सबको एक बात समझनी होगी कि अगर औद्योगिक इकाइयों को प्रदेश में आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी तो सरकारों को भी इसका फायदा होगा। सरकारों को लघु उद्योगों को प्रोत्साहित करने किए योजनाएं बनानी चाहिए। लघु उद्योग संपन्न होंगे तो इसका लाभ सरकारों को ही होगा। केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। दोनों के बीच तालमेल रहेगा तो उद्योग भी आगे बढ़ेंगे और देश-प्रदेश का भी विकास होगा। अगर कोई व्यक्ति औद्योगिक इकाई लगाना चाह रहा है तो उद्योग मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसे किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि लघु और बड़े उद्योगों में काम कर रहे मजदूरों के वेतन और उनकी देखभाल भी महत्वपूर्ण हैं।

हम पांच ट्रिलियन इकोनॉमी के नजदीक

फिक्की राजस्थान के को-चेयरमैन अक्षय हाड़ा ने कहा कि एमएसएमई को आगे बढ़ाना ही केंद्र और राज्य सरकारों की मंशा होनी चाहिए। दोनों सरकार मिलकर इसके लिए काम करें तो इसे काफी मजबूती मिलेगी। लघु उद्योग मजबूत होंगे तो देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इस तरह से हम पांच ट्रिलियन इकोनॉमी के नजदीक पहुंच सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिजनेस स्टार्टअप को बढ़ावा देती है तो इसका भी फायदा राज्य सरकार को होगा, सरकार को राजस्व प्राप्त होगा। राज्य के पास जीएसटी, खनिज जैसे राजस्व के साधन हैं जिनसे बेहतर आय होती है। उन्होंने कहा कि कई बार व्यापारी सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखते हैं, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं होता है। हम सबकों को चाहिए जितने भी संगठन हैं सबकों एक जाजम पर आकर एक-दूसरे लिए आवाज उठानी होगी। तभी सरकारें हमारी मांगों को गंभीरता से लेंगी।

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