
जयपुर।
लगता है कि राजस्थान ठगी की वारदातों अंजाम देने वाले गैंग्स का सबसे मुफीद ठिकाना बन गया है। खासतौर से ऐसी गैंग्स के सॉफ्ट टारगेट के तौर पर बेरोज़गार युवाओं का होना सामने आ रहा है। हाल ही में ऐंटी करप्शन ब्यूरो की टीम के हत्थे चढ़े 'मास्टरमाइंड' संदीप सिंह जादौन से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
ठगी से ऐंठ चुका करोड़ों की रकम
एसीबी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे एेंठने वाला संदीप सिंह जादौन बेरोजगार युवकों से करीब एक करोड़ से अधिक रकम एेंठ चुका है। उसके कारनामे के खुलासे के बाद उसके खिलाफ करीब-करीब शहर के हर इलाके से शिकायतें संबंधित थानों में दर्ज होने लगी हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह हाल ही में पर्वतीय पर्यटन स्थलों का दस दिन का ट्यूर करके लौटा था।
दरअसल, आरोपी संदीप सिंह जादौन खुद को एसीबी के आईजी का पीएस बताकर बेरोजगार युवक-युवतियों को एसीबी में यूडीसी बनाने का झांसा देकर रुपए एेंठ रहा था। एक पीडि़त ने एसीबी में पहुंचकर तस्दीक की तो उसकी ठगी का खुलासा हो गया। इसके बाद एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर उसे धर दबोचा और रामगंज थाना पुलिस को सौंप दिया।
थानाधिकारी अशोक चौहान का कहना है कि पूछताछ में इसने कई लोगों से अलग-अलग राशि में रुपए एेंठना कबूल किया है। आरोपी के बयानों को माने तो एक करोड़ से अधिक धनराशि अब तक लोगों से नौकरी का झांसा देकर एेंठ चुका है। फिलहाल आरोपी पुलिस की रिमांड पर है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि बीते दिनों ही संदीप दस दिन तक बद्रीनाथ, केदारनाथ, ऋषिकेश समेत कई धार्मिक स्थानों पर घूमकर आया है।
तीन पीडि़तों को फर्जी जॉइनिंग लेटर तक
पुलिस ने बताया कि आरोपी के झांसे में आए पीडि़त अब सामने आने लगे हैं। तीन तो एेसे पीडि़त भी बताए जा रहे हैं, जिन्हें आरोपी फर्जी ज्वॉइनिंग लैटर तक दे चुका है। वहीं आमेर, झोटवाड़ा, महेशनगर समेत कई थानों में पीडि़तों ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया है।
... इधर नकली स्टाम्प, टिकट बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़
झोटवाड़ा थाना पुलिस ने नकली सरकारी टिकट और स्टाम्प बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ कर दो अभियुक्तों को पकड़ा किया है। वे पिछले एक साल से यह धंधा कर रहे थे। उनके कब्जे से बड़ी संख्या में नकली टिकट, और स्टाम्प बरामद किए गए। ये स्टाम्प 13-14 साल पुराने बताए जा रहे हैं।
पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों को तलाश रही है। साथ ही नेटवर्क में शामिल वेंडर्स को भी खोजा जा रहा है। ऐसा अंदेशा है कि उनके पास स्टाम्प छापने की कोई मशीन भी है।
राजेश फिरोजाबाद (यूपी) से नकली स्टाम्प, टिकट खरीदता और उसे पीयूष को कमीशन लेकर बेच देता। उधर, पीयूष उसे जयपुर व अन्य जगहों पर वेंडर्स को मुनाफा कमा बेच देता था। बताया जा रहा है कि अभियुक्तों के कब्जे से 5, 100, 500 के नकली 650 टिकट बरामद किए हैं। साथ ही उनके पास से 100, 500 के 200 नकली स्टाम्प भी मिले हैं। आशंका है कि उनके पास और भी नकली स्टाम्प, टिकट हो सकते हैं।
500 का स्टाम्प 100 में
बताया जा रहा है कि राजेश फिरोजाबाद से 500 रुपए का स्टाम्प 100 रुपए में खरीदता था। फिर उसे 200 में पीयूष को बेच देता। उधर पीयूष अपना कमीशन लेकर आगे सरका देता। हालांकि ग्राहक को 500 के स्टाम्प के कमीशन सहित ज्यादा पैसे देने पड़ते। वेंडर्स के मुताबिक 20 फीसदी कमीशन सरकारी खजाने में जाता है जबकि 10 फीसदी कमीशन वे लेते हैं। उदाहरण के लिए 100 रुपए का स्टाम्प ग्राहक को 130, 500 का स्टाम्प 650 में बेचे जा रहे हैं। इसी तरह 50 रुपए के स्टाम्प के ग्राहक से 65 रुपए वसूले जा रहे हैं।
किस-किस वेंडर को बेचे
ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि पुलिस मामले में उन वेंडर्स को खोज रही है जिन्होंने नकली स्टाम्प, टिकट लेकर लोगों को आगे बेच दिए। साथ ही जिन सरकारी कामों में उन नकली स्टाम्प या नकली टिकट का उपयोग हुआ है उनकी वैधता क्या रहेगी पर इस पर भी मंथन किया जा रहा है।
Updated on:
04 Jun 2018 11:06 am
Published on:
04 Jun 2018 11:05 am

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