
लगता है कि चीन में टॉयलेट क्रांति की बयार बह निकली है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में 2015 से शुरू हुआ यह प्रयास अब पूरे देश के टॉयलेट्स में उफान पर है। इनमें टर्बो टॉयलेट्स से लेकर मुफ्त वाई-फाई, टेलीविजन स्क्रीन और एटीएम, वेडिंग मशीन की सुविधा भी है, ताकि लोग अपने बिल भी चुका सकें। कुछ टॉयलेट्स में फेशियल रिकॉग्नीशन सिस्टम भी लगा है, ताकि ‘लालची लोग’ अतिरिक्त टॉयलेट पेपर चुरा न सकें।
चीन के दो शहरों में तो टॉयलेट्स में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है कि एक व्यक्ति को 40 से लेकर 80 सेमी तक का ही टॉयलेट पेपर मिल पाएगा, वो भी उसका चेहरा स्कैन होने के बाद। अगर व्यक्ति को और पेपर चाहिए तो उसे पूरे नौ मिनट तक इंतजार करना होगा। इसका उद्देश्य न केवल टॉयलेट पेपर के दुरुपयोग को रोकना है, बल्कि टायलेट्स में मुफ्त रूप से मौजूद साबुन, टायलेट पेपर और पेपर टॉवल की चोरी रोकना है। गौरतलब है कि चीन के कई रेस्टरूम्स में चोरी होने के चलते टॉयलेट पेपर रखे ही नहीं जाते। राष्ट्रपति शी जिनपिंग का कहना है कि अभी टूरिस्ट प्लेस में तकनीक से लैस इन टॉयलेट्स को लगाया जा रहा है, इसके बाद गांवों और शहरों में ऐसे टॉयलेट बनाए जाएंगे। जिनपिंग के मुताबिक, टॉयलेट्स शहरी और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्टर के सुधार का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं।
चीन में टॉयलेट क्रांति की शुरुआत साल 2015 में हुई थी और तब से अब तक इसका इतना विस्तार हो चुका है कि टॉयलेट्स में फेशियल रिकॉग्नीशन तकनीक भी आ चुकी है। कुछ टॉयलेट्स में तो सेंसर्स भी लगाए हैं, जो किसी भी व्यक्ति से 10 मिनट से ज्यादा वहां रहने पर अलर्ट करते हैं। चीन में कई स्टॉल्स और यूरिनल्स के बाहर टेलीविजन स्क्रीन्स भी लगाई गई है। पिछले साल 68000 से अधिक पब्लिक टॉयलेट्स नवीनीकरण किया गया है, जो लक्ष्य से 20 फीसदी ज्यादा है। खास बात यह है कि चीन में सार्वजनिक शौचालय में साफ-सफाई एक बड़ा मुद्दा रहा है। गरीब तबके के करीब 14 मिलियन लोग खुले में शौच पर मजबूर हैं। चीन में गड्ढे नुमा पुराने टॉयलेट्स काफी बुरी स्थिति में थे। उनमें न तो दरवाजा था और न ही साबुन या टॉयलेट पेपर जैसी सुविधा। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि फेशियल रिकॉग्नीशन वाले ये टॉयलेट्स देश की फलते-फूलते पर्यटन उद्योग को धक्का पहुंचा सकते हैं।
Published on:
18 Apr 2018 03:13 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
