
जयपुर। विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण भाजपा-कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गया है। प्रत्याशी चयन के बाद दोनों की दलों को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी की सामना करना पड़ रहा है। भाजपा और कांग्रेस थिंक टैंक को अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं नाराजगी बगावत में तब्दील न हो जाए, इसलिए डैमेज कंट्रोल किया जा है, लेकिन कई जगह बगावत की बू आने लगी है।
जयपुर की जिले की कई सीटों पर पर नाराजगी सामने आ रही है। बगावत की आशंका के चलते कांग्रेस ने जयपुर जिले की आठ सीटों पर अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं कर पा रही है। वहीं भाजपा ने भी चार सीटों पर प्रत्याशी नहीं उतारे हैं।
ऐसा पहला बार नहीं है जब दोनों ही दलों को अपनों की बगावत का सामना करना पड़ रहा हो, बीते चुनावों में भी भाजपा-कांग्रेस के बागियों ने कई सीटों पर समीकरण बिगाड़े थे।
पार्टियां छोड़़ थामा था बगावत का झंडा
दऱअसल पिछले कई चुनावों में जयपुर जिले की करीब दस सीटों पर भाजपा और कांग्रेस छोड़ कई नेताओं और कार्यकर्ताओं बगावत का झंडा उठा लिया था। अपनों की बगावत के चलते कई सीटों पर भाजपा और कांग्रेस को नुकसान भी उठाना पड़ा था। बागियों ने बड़ी संख्या में वोट लेकर जीत-हार के समीकरण बदल दिए थे।
इन सीटों पर इन बागियों ने बिगाड़े समीकरण
दूदू-
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने पर पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में तोल ठोक दी थी। नागर ने कांग्रेस-भाजपा दोनों के प्रत्याशियों को पटखनी दी। कांग्रेस प्रत्याशी तो तीसरे नंबर पर रहे थे। इस बार नागर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
बस्सी
- दो चुनावों में लगातार हार के बाद पिछले चुनाव में कांग्रेस ने लक्ष्मण मीणा का टिकट काटकर दौलत मीणा को टिकट दिया था, जिससे नाराज होकर लक्ष्मण मीणा बागी होकर चुनाव मैदान में कूद गए। मीणा निर्दलीय चुनाव जीते और कांग्रेस प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहे।
शाहपुरा
यहां भी लगातार दो चुनाव हारने पर कांग्रेस ने आलोक बेनीवाल का टिकट काटकर मनीष यादव को प्रत्याशी बनाया था। इससे नाराज होकर बेनीवाल बागी होकर चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा।
विराट नगर
पिछली बार भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर कुलदीप धनकड़ बागी होकर चुनाव मैदान में कूद गए और करीब 40 हजार से ज्यादा वोट लिए। अपने बागी के चलते भाजपा को यहां नुकसान हुआ और त्रिकोणीय मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव जीत गए। हालांकि इस बार धनकड़ भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
फुलेरा
पिछले चुनाव में कांग्रेस नेता स्पर्धा चौधरी ने भी पार्टी से बगावत करके रालोपा के टिकट पर चुनाव लड़ी और करीब 10 हजार से ज्यादा वोट लिए। बगावत के चलते कांग्रेस को कम अंतर से ये सीट गंवानी पड़ी।
सांगानेर
यहां से भाजपा के टिकट पर लगातार तीन बार विधायक रहे घनश्याम तिवाड़ी ने पिछले चुनाव में भाजपा से बगावत कर अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ा। हालांकि बगावत के बाद भी यहां भाजपा प्रत्याशी की जीत हुई। बाद में तिवाड़ी कांग्रेस और बाद में वापस भाजपा में आ गए।
विद्याधर नगर
लगातार दो बार से हार के बाद पिछले चुनाव में कांग्रेस ने विक्रम सिंह शेखावत का टिकट काटकर सीताराम अग्रवाल को प्रत्याशी बनाया था। नाराज होकर विक्रम सिंह ने बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में ताल ठोक दी और करीब 40 हजार वोट लिए, बगावत के चलते यहां कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा।
चौमूं
पिछले चुनाव में भाजपा से दावेदारी जता रहे छुट्टन यादव ने पार्टी सले बगावत कर चुनाव लड़ा और करीब 40 हजार वोट लिए। छुट्टन यादव की बगावत के चलते भाजपा प्रत्य़ाशी को बहुत ही कम अंतर जीत हासिल हुई।
चाकसू
साल 2013 के विधानसभा चुनाव में पूर्व विधायक अशोक तंवर ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और 30 हजार से ज्यादा वोट लिए। इसके चलते कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश बैरवा को हार का सामना करना पड़ा।
Published on:
04 Nov 2023 12:13 pm
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