
उम्र के अनुसार विटामिन खुराक पर दें ध्यान
किशोरावस्था में
इस उम्र में विटामिन डी एवं कैल्शियम पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। दरअसल, हड्डियों और मसल्स की ग्रोथ के लिए ये दोनों ही जरूरी होते हैं। यदि इस विटामिन और मिनरल पर ध्यान नहीं दिया तो हड्डियां कमजोर रह जाएंगी और भविष्य में हड्डियों के रोग का खतरा बढ़ जाएगा। हेल्थ एक्सपट्र्स के अनुसार हेल्दी डाइट लेने के साथ ही चिकित्सक की सलाह से कैल्शियम और विटामिन डी की उचित खुराक भी ले सकते हंै।
२० वर्ष से ३० साल तक
इ स उम्र में भी आप कैल्शियम एवं विटामिन डी की खुराक को नियमित रख सकते हैं लेकिन अन्य विटामिन्स एवं मिनरल्स पर ध्यान देना भी जरूरी है। २० वर्ष की आयु में प्रवेश करने के बाद विटामिन बी१२ का भी ध्यान रखें। यदि आप मां बनने वाली हैं तो जरूरी विटामिन्स के साथ ही फोलिक एसिड एवं विटामिन बी-कॉम्प्लैक्स को डाइट में शामिल करें। हेल्दी पे्रग्नेंसी के लिए फॉलिक एसिड एवं बी विटामिन्स बहुत जरूरी होते हैं। इससे शिशु में ऑटिज्म का रिस्क भी कम हो जाता है। यदि मासिक धर्म के दौरान ज्यादा परेशानी होती है तो आयरन की खुराक पर ध्यान दें। इन दिनों ज्यादा आयरन फूड का सेवन करें।
३० के बाद बढ़ सकते हैं रोग
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार ३०वर्ष बाद से ही यदि एंटी इंफ्लेमेटरी ओमेगा-३ फैटी एसिड का ध्यान रखा जाए तो हृदय रोगों का खतरा कम किया जा सकता है। इसलिए फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को सेवन करें। यदि आप शाकाहारी हैं तो ओमेगा-३ फैटी एसिड का सप्लीमेंट ले सकते हैं। इस उम्र में भी कैल्शियम और विटामिन डी जरूरी है। ४०वें वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही हड्डियों संबंधी रोगों का खतरा भी बढऩे लगता है। इसलिए रक्त में विटामिन के लेवल को बनाए रखने के लिए सप्लीमेंट लेने के साथ ही सूर्य की रोशनी मेें बैठें। कैंसर, डायबिटीज, मोटापा जैसी बीमारियों से बचने के लिए ओमेगा-३ पर भी ध्यान दें।
५० के बाद बढ़ा दें खुराक
उम्र के इस फेज में आपको रोजाना १२०० एमजी कैल्शियम लेना चाहिए। इस मिनरल के अवशोषण के लिए विटामिन डी भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। यदि कैल्शियम की खुराक लेने के बाद भी बॉडी कैल्शियम का अवशोषण नहीं कर पा रही है तो चिकित्सक से परामर्श लें एवं उचित जांच करवाएं। इसके बाद ही विटामिन डी एवं कैल्शियम सप्लीमेंट लें। मेनोपॉज में भी ध्यान रखें।
६० के बाद सतर्क रहें
इस उम्र में समय-समय पर जांच करवाने के साथ ही चिकित्सक की सलाह से उचित विटामिन्स एवं मिनरल्स के सप्लीमेंटस का सेवन करना शुरू कर दें। हार्ट हेल्थ के लिए ओमेगा-३ फैटी एसिड लें। इस उम्र के बाद शरीर के विटामिन बी१२ भी महत्त्वपूर्ण होता है। विटामिन बी१२ की कमी से टाइप-१ एवं टाइप-२ डायबिटीज का रिस्क बढ़ सकता है। साथ ही स्वस्थ और लंबी आयु के लिए शारीरिक सक्रियता का भी ध्यान रखें।
Published on:
26 May 2018 03:15 pm
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