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आखिर मैं खुद पर गर्व क्यों न करूं…

समय के साथ-साथ सभी को बदलना पड़ता है। मुझे लगता है कि आज के समय में गृहिणी भी जरा-सी बदल गई है क्योंकि आज की नारी सशक्त है। पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक मामले में भी वह फैसले लेने लगी है।
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आखिर मैं खुद पर गर्व क्यों न करूं...

आखिर मैं खुद पर गर्व क्यों न करूं...

अधिकतर महिलाएं अब नौकरीपेशा हैं जिन्हें देखकर नौकरी नहीं करने वाली गृहिणियां स्वयं को थोड़ा कमजोर समझने लगती हैं। पर ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। गृहिणी के बिना घर की कल्पना भी नहीं की जाती। भले ही आप नौकरीपेशा नहीं हैं। लेकिन परिवार की जिम्मेदारी वें बखूबी निभा रही हैं। गर्व से कहना चाहिए उन्हें कि हां मैं एक गृहिणी हूं। गृह प्रबंधन भी अपने आप में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। शादी के तुरंत बाद ही आपकी 24 घंटे वाली ड्यूटी शुरू हो जाती है और वह जीवन पर्यन्त चलती है। परिवार के सुख में, दुख में पूरी निष्ठा से वह साथ निभाती है। परिस्थितियों के अनुसार अपनी खुशियों का त्याग भी अगर करना पड़ें तो उसे भी बिना किसी शिकायत के कर देती है।

किसी ने क्या खूब कहा है कि 'नारीवाद महिलाओं को मजबूत बनाने के बारे में नहीं है। महिलाएं पहले से ही मजबूत हैं। यह दुनिया को उस ताकत के तरीके को बदलने के बारे में है।'

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