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सादगीपूर्ण तरीके से मनाया सीता जी का प्राकट्य दिवस, गाए बधाई गान

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जयपुर

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Harshit Jain

May 02, 2020

bhilwara  jaipr city

सादगीपूर्ण तरीके से मनाया सीता जी का प्राकट्य दिवस, गाए बधाई गान


जयपुर.
वैशाख मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शनिवार को जनक नंदनी माता सीता का प्राकट्य दिवस जानकी नवमी का पर्व मनाया गया। गणगौर से लेकर रामनवमी और अन्य पर्व भी लॉकडाउन के कारण सादगीपूर्ण तरीके से मनाए जा रहे हैं। स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त होने से इस दिन शादियों सहित मांगलिक कार्यों की धूम इस बार सूनी रही। मंदिरों में भगवान राम सहित मां जानकी का व्रत, पूजन हुआ। इस दौरान महिलाओं ने पति की दीर्घायु, संतान और पारिवारिक शांति-आरोग्यता के लिए महिलाओं ने घर पर ही भगवान राम-जानकी की पूजा अर्चना की। चांदपोल, छोटीचौपड़, गलता जी, टोंक फाटक, राजापार्क सहित अन्य सीता राम मंदिरों में महंत, पुजारियों के सान्निध्य में कार्यक्रम हुआ। सोशल नेटवर्क पर भक्तों ने मंदिर के दर्शन किए।

चांदपोल बाजार स्थित रामचंद्र जी मंदिर में महंत राधेश्याम तिवाड़ी के सान्निध्य में सीताजी का पंचामृत अभिषेक के बाद रजवाड़े से आभूषण श्रृंगार किया। दोपहर में जन्म आरती के बाद शाम को संध्या आरती हुई। वहीं रामदरबार को ठंडे ऋतु फलों आम, तरबूज, खरबूजा का भोग लगाया गया। इस दौरान आज महामंगल मिथलपुर,घर घर बजत बधाई री, सिया जी का जन्मदिन आप रघुवर को मुबारक हो सहित अन्य बधाई गायन गाए। महंत ने बताया कि सालभर में सीताजी के चरण कमल के दर्शन सिर्फ जानकी नवमी के दिन ही हुए। भगवान से देश की खुशहाली और कोरोना से मुक्ति की कामना की गई।


सरस निकुंज दरीबा पान में महंत अलबेली माधुरी शरण के सान्निध्य में ठाकुर राधा सरस बिहारी जू सरकार के जानकी जन्मोत्सव के मौके पर किशोरी जी का अभिषेक किया और पुष्पों का श्रृंगार किया गया। प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि विविध प्रकार से लाड लड़ाए गए। वहीं
जनक नंदनी प्रगट भई है , जाको त्रिभुवन में छायो बधाई गायन गाया।


चांदनी चौक स्थित आनंदकृष्ण बिहारी मंदिर में पं.मातृप्रसाद शर्मा के सान्निध्य में भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया।


गलता ट्रस्ट के गलताजी स्थित सीतारामजी मंदिर में आचार्य अवधेशाचार्य के सान्निध्य में सीताजी के तीन दर्शन स्वयंवर, वनवास और राज्याभिषेक के अति प्राचीन विग्रहों का वैदिक विधि से मंत्रोच्चरण के साथ अभिषेक किया गया। पंचामृत, पंचमेवा, फलों, पंचद्रव्य, सर्वऔषधि के अभिषेक के बाद सहस्त्रधारा की गई। इसके बाद तुलसी एवं पुष्पों से अर्चना की गई।

चिंताहरण काले हनुमान जी मंदिर में महंत मनोहरदास के सान्निध्य में पूजा अर्चना और पंचामृत अभिषेक के बाद विशेष यज्ञ हुआ। हाथोज धाम के दक्षिण मुखी बालाजी मंदिर में स्वामी बालमुकुंदाचार्य सान्निध्य में पंचामृत अभिषेक कर नई पोशाक धारण कराई गई गई। दोपहर को महाआरती की।