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बालिका शिक्षा पर संकट: झिनझिनयाली विद्यालय के तीन कक्ष जर्जर

बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चल रही है, प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी स्कूलों की हालत उजागर कर रही है।

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बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चल रही है, प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी स्कूलों की हालत उजागर कर रही है। उपखंड फतेहगढ़ की उपतहसील झिनझिनयाली के बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 200 से अधिक छात्राओं का नामांकन है, लेकिन भवन की स्थिति भयावह है। विद्यालय में बने पांच कक्षा-कक्षों में से तीन पूरी तरह जर्जर हैं और बंद पड़े हैं। शेष दो कक्षों में दसवीं और ग्यारहवीं की छात्राएं बैठती हैं, जबकि पहली से नौवीं तक की सभी छात्राओं को एक ही टीनशेड के नीचे पढ़ाया जा रहा है। इससे शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और बालिकाओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। बरसात में जर्जर कक्षों के ध्वस्त होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे छात्राएं डर के साए में हैं। विद्यालय में एक भी महिला अध्यापिका नहीं है। रसोईघर की दीवारों में दरारें हैं और छत गिरने की कगार पर है। पेयजल के लिए बना टांका भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।

सुविधाओं का टोटा

ग्रामीण फतेहसिंह, समाजसेवी, का कहना है कि यह विद्यालय आठ-दस गांवों के लिए एकमात्र बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय है। जर्जर कक्षों और सुविधाओं के अभाव में छात्राएं पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हो रही हैं।
प्रधानाचार्य इंद्राराम पन्नू ने बताया कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया गया है और उपतहसील भवन में वैकल्पिक रूप से विद्यालय चलाने की मांग भी की गई है, लेकिन अभी तक कोई आदेश नहीं मिला है।