पड़ोसी देश में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और बीते शनिवार शाम को दोनों देशों की ओर से किए गए सीजफायर के एलान के बाद सीमावर्ती जैसलमेर में रविवार सुबह से जनजीवन पटरी पर लौट आया।
पड़ोसी देश में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की ओर से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर और बीते शनिवार शाम को दोनों देशों की ओर से किए गए सीजफायर के एलान के बाद सीमावर्ती जैसलमेर में रविवार सुबह से जनजीवन पटरी पर लौट आया। गत चार दिनों से ब्लैकआउट और शनिवार को दिनभर लॉकडाउन के चलते पाबंदियों के बीच रह रहे लोगों ने रविवार को खुली हवा में सांस ली। सुबह 9 बजे से बाजार खुलना शुरू हो गए और 10 बजे तक लगभग सभी दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान रोजमर्रा की भांति खुल गए। धीरे-धीरे सडक़ों पर भी चहल-पहल बढ़ती देखी गई। लोगों ने फल-सब्जी, किराना से लेकर अपनी जरूरत की चीजों की खरीदारी की। ग्रामीण क्षेत्रों से जैसलमेर आने वाले लोगों की संख्या में अवश्य कमी दर्ज की गई है। उनकी संख्या आम दिनों की तुलना में करीब 20 से 30 फीसदी ही रही। जिला प्रशासन की ओर से भी सुबह आम सूचना जारी कर सभी गतिविधियां सुचारू रूप से चलाए जाने की अनुमति दी गई। रविवार का दिन होने से सरकारी और गैरसरकारी दफ्तरों में अवकाश रहा। इस वजह से भी सडक़ों पर आवाजाही में कमी देखी गई।
रविवार को गली-मोहल्लों से लेकर चौक-चौराहों व बाजारों में जहां भी दो-चार लोग मिलते, सबके बीच चर्चा के केंद्र में भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले दिनों की घटनाएं रही। सबसे ज्यादा चर्चा भारत की ओर से शनिवार शाम को सीजफायर स्वीकार करने पर सुनी गई। बहुत बड़ी संख्या में लोग अपने-अपने लिहाज से सरकार के इस निर्णय की व्याख्या करते भी देखे गए। सोशल मीडिया पर सैकड़ों की तादाद में लोग इस विषय पर पोस्ट्स अपलोड कर रहे हैं या टिप्पणियां करते हुए अपने विचार रख रहे हैं।
पड़ोसी देश से सशस्त्र संघर्ष के कारण सीमांत जैसलमेर जिले में आवागमन व्यवस्था पर पड़ा असर रविवार को लगभग समाप्त हो गया। पिछले दिनों से जैसलमेर के लिए चलने वाली यात्री टे्रनों का शेड्यूल प्रभावित हुआ था। जानकारी के अनुसार उन सभी को रिस्टोर कर दिया गया है। बसों से लेकर निजी वाहनों के माध्यम से आवाजाही भी सुचारू हो गई।