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कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ रहा गोडावण का कुनबा, 4 नए सदस्यों का जन्म

कृत्रिम गर्भाधान के जरिए दुर्लभ और राज्यपक्षी गोडावण का कुनबा बढ़ाने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं।

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कृत्रिम गर्भाधान के जरिए दुर्लभ और राज्यपक्षी गोडावण का कुनबा बढ़ाने के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। जिले के सम स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में गत दिनों के दौरान गोडावण के 4 और चूजों का सफलतापूर्वक जन्म हुआ है। इससे वैज्ञानिकों सहित वन विभाग व वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह का वातावरण है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक से गत 19, 23 व 27 अप्रेल एवं 1 मई को कुल 4 चूजों ने जन्म लिया। इसके साथ सम व रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर्स में गोडावणों की कुल संख्या 59 तक पहुंच गई है। बताया जाता कि कृत्रिम गर्भाधान से गोडावण को पैदा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है। जानकारी के अनुसार सम सेंटर में 4 मादा गोडावणों ने अंडे दिए, जिनसे चूजों ने जन्म लिया। कृत्रिम गर्भाधान तकनीक से अब तक 7 गोडावण जन्म ले चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले साल 2024 में पहली बार इसी प्रक्रिया को अपनाकर एक गोडावण का जन्म हुआ था। जिसके बाद साल 2025 में इसी तकनीक से अब तक 7 गोडावण हो जन्म हो चुका है।

इस वर्ष 15 गोडावण का जन्म

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से बताया गया है कि चालू वर्ष में ब्रीडिंग सेंटरों में अब तक 15 गोडावणों का जन्म हो चुका है। यह इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों की सफलता का द्योतक है। गौरतलब है कि कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के अंतर्गत नर गोडावण के सामने एक कृत्रिम मादा रखी जाती है और उसे मेटिंग के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। जिससे वह स्पर्म दे सके। इक_े किए गए स्पर्म से मादा गोडावण से कृत्रिम गर्भाधान करवाया जाता है।

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