script 16 लाख रुपए का गोबर पेंट, सरकार के जाने के बाद अब न मिल रहे खरीदार और न चल रही मशीन | Cow dung paint worth Rs 16 lakh, not finding buyers | Patrika News

16 लाख रुपए का गोबर पेंट, सरकार के जाने के बाद अब न मिल रहे खरीदार और न चल रही मशीन

locationजांजगीर चंपाPublished: Dec 28, 2023 05:15:38 pm

पूर्ववर्ती सरकार के इस काम में महिला स्व सहायता समूह को आजीविका के रूप में बड़ा काम मिला था वह भी ठप है साथ ही उनके उत्पाद की बिक्री भी ठप पड़ गई है

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रीपा गोठान में गोबर पेंट बनाने का कारोबार ठप पड़ गया है। पूर्ववर्ती सरकार के इस काम में महिला स्व सहायता समूह को आजीविका के रूप में बड़ा काम मिला था वह भी ठप है साथ ही उनके उत्पाद की बिक्री भी ठप पड़ गई है। गोदाम में लाखों का गोबर पेंट का स्टॉक धूल खाते पड़ा है।
जिले के अधिकतर रीपा गोठान में आजीविका के गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ गई है। नई सरकार भी अब इन गोठानों के प्रति रुचि नहीं दिखा रही है। इस तरह के हालात किसी एक गोठान में नहीं बल्कि हर गोठान का यही हाल है। जिनते भी गोठान हैं उन गोठानों में आजीविका के जितने भी साधन है सभी ठप पड़ते दिखाई दे रही है। ऐसे में जिन लोगों ने लाखों खर्च कर अपने आजीविका के साधन संचालित कर रहे थे उन्हें काम नहीं मिल रहा है। गौरतलब है कि जांजगीर-चांपा व सक्ती जिला मिलाकर 9 रीपा गोठान है। जिसमें सभी तरह की गतिविधियां ठप पड़ी है।
महिला स्व सहायता समूहों के माथे पर अब चिंता की लकीरें दिखाई पड़ रही है। दरअसल, पूरा मामला बम्हनीडीह ब्लाक के गौरव ग्राम अफरीद का है। जहां महिला स्व सहायता समूह ने आजीविका के साधन के लिए 16 लाख रुपए का गोबर पेंट का निर्माण किया था। जब कांग्रेस की सरकार थी तो पेंट की बिक्री भी धड़ल्ले से हो रही थी। डिमांड व आपूर्ति के हिसाब से महिला स्व सहायता समूहों ने धड़ाधड़ गोबर पेंट का निर्माण तो कर दिया, लेकिन अब इनके उत्पाद की डिमांड ठप पड़ गई है।

इसके चलते उनके उत्पाद गोदाम में धूल खाते पड़ी है। गौरव ग्राम अफरीद में विश्वा महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष राजेश्वरी नागेश बताया कि रीपा शेड में गोबर पेंट का निर्माण किया। इन्होंने 16 लाख 39 हजार रुपए का गोबर पेंट का निर्माण किया, लेकिन उनके 16 लाख के गोबर पेंट में अब तक केवल 5 लाख 51 हजार रुपए की आय हुई है। शेष 11 लाख रुपए का गोबर पेंट शेड में ही धूल खाते पड़ी है। क्योंकि सरकार बदलते ही इनके द्वारा निर्मित पेंट की बिक्री ठप पड़ गई है। अब इन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि उनके बचे 11 लाख रुपए के पेंट की बिक्री होगी या नहीं, यदि पेंट की बिक्री नहीं हुई तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा।
रीपा गोठान में आजीविका के साधन में एक गोबर पेंट का निर्माण भी शामिल था। लेकिन गोबर पेंट के खरीददार नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते स्टॉक जाम है।

चिंता बाई भैना, सरपंच अफरीद

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