राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी ने विलय का सिद्धांत बनाया और उसके तहत रानी लक्ष्मीबाई के दत्तक पुत्र दामोदर राव के राजसिंहासन पर बैठने का अधिकार खारिज करके झांसी को अपने अधीन कर लिया। रानी को साठ हजार रुपये पेंशन दिए गए और झांसी के महल को छोड़ने का आदेश दे दिया। तभी रानी ने ऐलान किया कि मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी। उन्होंने झांसी की रक्षा के लिए स्वेच्छा सैनिकों को मजबूत किया। इसमें सुंदर, मुंदर, जुही जैसी महिला सैनिकों के साथ गुलाम गौस खां, दोस्त खां, खुदा बख्श, दीवान रघुनाथ सिंह और दीवान जवाहर सिंह आदि थे।