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दावा : दुनिया की सबसे मोटी किताब, वजन 29.35 किलो, लिखने में लगे 12 साल, जानें खासियत

स्टडी ऑफ एनवायरनमेंटल एंड मेडिकल साइंसेज के नाम से तैयार की गई पुस्तक को दुनिया की सबसे मोटी किताब होने का दावा किया गया है। झुंझुनूं जिले के दो प्रोफसर ने इस पुस्तक का तैयार किया है। इसमें 12, 104 पेज हैं।

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अलसीसर. स्टडी ऑफ एनवायरनमेंटल एंड मेडिकल साइंसेज के नाम से तैयार की गई पुस्तक को दुनिया की सबसे मोटी किताब होने का दावा किया गया है। झुंझुनूं जिले के दो प्रोफसर ने इस पुस्तक का तैयार किया है। इसमें 12, 104 पेज हैं। इसकी मोटाई 26.5 इंच और वजन 29.35 किलोग्राम बताया गया है। पुस्तक का नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजा गया है। महारानी गर्ल्स पीजी कॉलेज रामपुरा के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार शर्मा व सिंघानिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. रविन्द्र कुमार शर्मा के संयुक्त प्रयासों से यह पुस्तक तैयार की गई है। इसे एसएन पब्लिशिंग कंपनी की ओर से प्रकाशित कराया गया है। पुस्तक को 45 अध्यायों के साथ बनाया गया है।

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इस पुस्तक में भारत व राजस्थान प्रदेश में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की भौगोलिक स्थिति, उनकी उपयोगिता और चिकित्सा भूगोल, पर्यावरण भूगोल, संसाधन भूगोल आदि पर विस्तृत प्रकाश डाला गया है। पुस्तक को गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए आवेदन प्रस्तुत कर दिया गया है। इस मौके पर संस्थान निदेशक महेन्द्र चौधरी भी मौजूद रहे।


महारानी गर्ल्स पीजी कॉलेज रामपुरा के प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि पुस्तक लिखने में करीब 12 साल का समय लगा है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन अलग-अलग प्लेटफार्म पर विभिन्न अध्ययन सामग्री को देखने के बाद मन में आया कि एक ही किताब में बहुत सी सामग्री को समाहित कर दिया जाए। इसी जुनून के चलते उन्होंने यह पुस्तक लिखने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों में किए गए शोध कार्य को इसमें शामिल किया गया है। इससे रिसर्च, पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों आदि को फायदा होगा। पुस्तक के लिए कई प्रोफेसर से सुझाव भी लिए गए हैं।

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