
कोरोना का हॉटस्पॉट बने नागौरी गेट में कफ्र्यू की सख्ती से पालना नहीं होने का मामला कोर्ट पहुंचा
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर में कोविड-19 के हॉटस्पॉट बन चुके नागौरी गेट एरिया में कफ्र्यू की कड़ाई से पालना नहीं होने सहित महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी और स्क्र्रीनिंग के नाम पर कागजी खानापूर्ति का दावा करते हुए दायर जनहित याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार को 20 अप्रैल को जवाब तलब किया है। वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा तथा न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खंडपीठ में अधिवक्ता विवेक श्रीमाली की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता महेन्द्रसिंह सिंघवी तथा केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आरडी रस्तोगी ने उपस्थिति दी।
याची के अधिवक्ता हिमांशु माहेश्वरी ने याचिका में बताया कि नागौरी गेट एरिया को कोविड-19 के संक्रमित सामने आने के बाद 5 अप्रैल को हाई रिस्क जोन घोषित किया गया था, जिसके बाद से वहां कफ्र्यू लगा दिया गया। इसके बावजूद कफ्र्यू की कड़ाई से पालना नहीं की जा रही। याचिका के अनुसार डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग प्रोफेशनल तरीके से नहीं की जाकर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। सर्वे करने वाले केवल खांसी-जुखाम है या नहीं, यह पूछकर जा रहे हैं, जबकि सभी सदस्यों की थर्मल गन से स्क्रीनिंग नहीं की जा रही।
इलाके के कुछ असामाजिक तत्व महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। इस आशय की खबरें भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई है। जिला प्रशासन पर भी ज्यादा सजगता से काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एडवाइजरी का उल्लंघन किया जा रहा है। याचिका में कफ्र्यूग्रस्त इलाके में आरएसी, सीआरपीएफ या बीएसएफ की टुकडिय़ों की तैनाती करने तथा भीलवाड़ा मॉडल को सख्ती से लागू करने की गुहार की गई है।
Published on:
17 Apr 2020 11:12 am
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