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बार कौंसिल चुनावों से पहले हाई-पावर्ड कमेटी और बीसीआई आमने-सामने

कमेटी ने बार कौंसिल के प्रशासनिक कामकाज के लिए एक विशेष समिति बना दी है।

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Rajasthan High Court Lawyers judicial proceedings boycott today find out why Bar Council is upset

फाइल फोटो पत्रिका

जोधपुर. बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के 22 अप्रेल को प्रस्तावित चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी और कौंसिल के निर्वतमान अध्यक्ष भुवनेश शर्मा व बार कौंसिल ऑफ इंडिया के बीच टकराव की स्थिति सामने आई है। कमेटी ने बार कौंसिल के प्रशासनिक कामकाज के लिए एक विशेष समिति बना दी है।

हाई-पावर्ड कमेटी ने 19 फरवरी को आदर्श आचार संहिता लागू करते हुए कहा था कि नवनिर्वाचित निकाय के गठन तक बार कौंसिल के सभी कार्य महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद की निगरानी में होंगे। इस पर कार्यवाहक सचिव विकास ढाका ने 23 फरवरी को महाधिवक्ता को पत्र लिखा। बार कौंसिल के निवर्तमान अध्यक्ष भुवनेश शर्मा ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्यवाहक सचिव को मौखिक रूप से निलंबित करने का आदेश दिया।

उन्होंने कहा कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 8 ए के तहत विशेष समिति बनाने का अधिकार केवल बार कौंसिल ऑफ इंडिया को है। इसके बाद बीसीआई ने भी कार्यवाहक सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा कि हाई-पावर्ड कमेटी का अधिकार क्षेत्र सिर्फ चुनाव प्रक्रिया तक सीमित है, प्रशासन में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।

हाई-पावर्ड कमेटी ने इन सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेआर मिढ़ा की अध्यक्षता वाली कमेटी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 18 नवंबर, 2025 के आदेश के तहत संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया उनके नियंत्रण में है, इसलिए वे चुनाव से जुड़े सभी कार्यों के लिए सशक्त हैं। कमेटी ने तर्क दिया कि राजस्थान बार कौंसिल का विस्तारित कार्यकाल 16 जनवरी 2026 को समाप्त हो चुका है, इसलिए सदस्य प्रशासनिक कार्यों के लिए सक्षम नहीं हैं।

तीन सदस्यीय विशेष समिति गठित

हाई-पावर्ड कमेटी ने तीन सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष तथा वरिष्ठ अधिवक्ता जगमाल सिंह चौधरी और अशोक मेहता बतौर सदस्य शामिल हैं। कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष समिति एडवोकेट्स एक्ट की धारा 8ए के तहत गठित की गई है और नवनिर्वाचित निकाय के गठन तक बार कौंसिल के सभी कार्य इसी के निर्देशानुसार होंगे। कार्यवाहक सचिव को बीसीआई के नोटिस का जवाब न देने का निर्देश दिया गया है। महाधिवक्ता ने बुधवार को कार्यग्रहण कर लिया।