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जोधपुर। अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न प्रकरण) सुषमा पारीक ने बलात्कार के मामले का निस्तारण करते हुए फैसले में लिखा कि पत्नी की उपस्थिति में पति द्वारा अन्य महिला का बलात्कार करना तथा पत्नी के सहयोग करने और वीडियो बनाने के आरोप अस्वाभाविक व अविश्वसनीय प्रकट होते हैं। एक पति की ओर से अपनी पत्नी के सामने किसी अन्य महिला के साथ बलात्कार किया जा रहा हो और पत्नी इसमें सहयोग कर रही हो, ऐसे कोई तथ्य विश्वसनीय नहीं हो सकते।
कोर्ट ने प्रतापनगर पुलिस थाने में 9 वर्ष पूर्व दर्ज बलात्कार के मामले में आरोपी पति-पत्नी को बरी कर दिया। प्रतापनगर निवासी 39 वर्षीय आरोपी तथा उसकी 32 वर्षीय पत्नी की ओर से अधिवक्ता नीलकमल बोहरा तथा गोकुलेश बोहरा ने बचाव करते हुए कहा कि पीडि़ता द्वारा दर्ज कराई एफआईआर तथा न्यायालय के समक्ष हुए बयानों में विरोधाभासी तथ्य सामने आए हैं। महिला ने स्वीकार किया कि आरोपी से आकर्षित रही। उसके घर चार-पांच साल रही, साथ में घूमने गए। इस दौरान कभी भी किसी से भी स्वयं के साथ हुए दुष्कर्म का जिक्र नहीं किया। किस दिन मारपीट और बलात्कार किया गया, यह भी स्पष्ट नहीं है। आरोपी को संदेह के आधार पर बरी किया जाए। अपर लोक अभियोजक ने आरोपी को सजा देने की मांग की। न्यायालय ने कहा कि मौखिक तथा दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर अभियुक्तगण के विरुद्ध संदेह से परे अपराध साबित करने में अभियोजन असफल रहा। अभियोजन कहानी विरोधाभासी व अविश्वसनीय होने के आधार पर आरोपी पति पत्नी को बरी कर दिया।
यह है मामला
वर्ष 2016 में परिवादिनी ने प्रतापनगर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करा कर बताया कि वह स्वयं शादीशुदा है तथा आरोपी भी शादीशुदा है। जान पहचान बढ़ने के बाद झांसे में आ गई तथा आरोपी के साथ रहने उसके घर चली गई। महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी तथा उसकी पत्नी ने उसे नौकरानी की तरह रखा। दोनों ने जान से मारने की धमकी देते हुए मारपीट की तथा आरोपी ने पत्नी के सहयोग से बलात्कार किया। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी की पत्नी ने बलात्कार के दौरान वीडियो भी बनाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया।
Published on:
28 Jun 2023 01:04 pm
