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गजब का खेल रचा नेवी अफसर…खुद को मरा बताकर 20 साल तक छुपा रहा, पत्नी भी उठाती रही पेंशन, ऐसे सामने आया पूरा मामला

एक नेवी अफसर ने अपनी ही मौत की साजिश रची और 20 साल तक फरार रहा। कहानी पूरी फिल्मी है।

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जोधपुर। एक नेवी अफसर ने अपनी ही मौत की साजिश रची और 20 साल तक फरार रहा। कहानी पूरी फिल्मी है। मुख्य किरदार हैं रिटायर्ड नेवी अफसर बालेश कुमार, जो कि 1996 में नेवी से रिटायर्ड हुए। रिटायरमेंट के बाद बालेश कुमार ने अपने भाई सुंदरलाल के साथ दिल्ली में व्यवसाय शुरू किया। उसका अपने साले राजेश उर्फ खुशीराम की पत्नी से प्रेम प्रसंग था, जिसके चलते दोनों के बीच कई बार विवाद होता था। मार्च 2004 में बालेश कुमार ने राजेश उर्फ खुशीराम को दिल्ली बुलाया। उन्होंने उसे शराब पिलाई और भाई के साथ मिलकर गला घोंटकर हत्या कर दी। मामले में सुंदरलाल को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन बालेश ने झूठी कहानी बनाकर खुद को बचाता रहा।

पुलिस मामले की जांच में जुटी थी, इसी बीच एक साजिश के तहत बालेश कुमार ने खुद को पुलिस के सामने मृत साबित करने के लिए दो महीने बाद मई 2004 में अपनी कंपनी में काम करने वाले दो मजदूर बिहार निवासी मनोज और मुकेश को मार डाला। पीने के लिए शराब दी गई। इसके बाद जब वह नशे के कारण बेहोश हो गया तो उन्होंने उसे ट्रक में बैठाया और उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। घटना के समय बालेश की पत्नी संतोष ने मृतकों में से एक की पहचान बालेश के रूप में की।

अब पुलिस के लिए वह मर चुका था, लेकिन हकीकत कुछ और थी। उसने अपना नाम बदलकर अमन सिंह रख लिया और दिल्ली में ही प्रॉपर्टी डीलर का कारोबार शुरू कर दिया। 2004 से सितंबर 2023 तक पुलिस को गुमराह रखा। दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी के एक मामले में अमन सिंह को सितंबर 2023 में गिरफ्तार किया। इस बीच, उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। धोखाधड़ी मामले की 5 महीने की जांच के बाद पुलिस को पता चला कि अमन सिंह का असली नाम बालेश कुमार है। जो जोधपुर के डांगियावास का रहने वाला है। पुलिस ने जोधपुर के डांगियावास थाने में फोन कर जानकारी जुटाई तो पता चला कि बालेश की 20 साल पहले मौत हो चुकी है।

जानकारी मिलने पर जोधपुर से डांगियावास थाने के SI मनोज कुमार दिल्ली गए। तो मालूम चला कि यही वो आरोपी है जिसने ट्रक में 2 लोगों को जिंदा जलाकर अपने मरने की झूठी कहानी रची थी। अब जल्द ही प्रोडक्शन वारंट पर आरोपी को जोधपुर लाया जाएगा। इस मामले में आगे जांच की जाएगी। उसकी पत्नी संतोष विधवा के रूप से रूप में 2004 से पेंशन लेती रही। वह जोधपुर ही रहती थी, कभी-कभी बालेश से मिलने 2 बेटों के साथ नजफगढ़ स्थित घर आती थी। पूरी घटना में उसकी पत्नी संतोष भी शामिल थी और उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है।