
Mehdi Hassan in jodhpur
जोधपुर . गजल गायन के शहंशाह मेहदी हसन के चाहने वाले जोधपुर शहर में भी बहुत हैं। आम संगीतकार और गायक तो उन्हें अपना आइडियल मानते ही हैं। संगीत रसिक श्रोता भी उन्हें इज्जत की नजर से याद करते हैं। उनकी नजर में मेहदी हसन का दिलकश गायन कभी नहीं भुलाया जा सकता। गुणजनों कहते हैं कि वे हर गजल को नई राग की बंदिश में पेश कर आवाज का जादू जगा देते थे।
लता मंगेशकर मेहदी हसन की गजलें सुनती हैं
स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर अक्सर कहती हैं कि वे रात को सोते वक्त मेहदी हसन की गजलें सुनती हैं। राजस्थान और मारवाड़ में भी उनके चाहने वाले कम नहीं हैं। वे 10 अप्रेल 1994 को पहली और आखिरी बार ही जोधपुर आ सके। यह तारीख आने पर उनकी यादें फिर से ताजा हो उठी हैं।
सुबह चार बजे तक चला था कार्यक्रम
मुझे आज भी याद है गजल गायन के बादशाह मेहदी हसन ने 10 अप्रेल 1994 को सांस्कृतिक संस्था स्वर सुधा की मेजबानी में जब शहर के उम्मेद भवन पैलेस की बारादरी मेंं गजल गायन कार्यक्रम पेश किया था तो यहां की जनता उन्हें सुनने के लिए उमड़ पड़ी थी। यही नहीं उस समय की पर्यटन, कला व संस्कृति मंत्री स्व.पुष्पा जैन कार्यक्रम उन्हें सुनने के लिए विशेष कर जोधपुर आई थीं। वहीं पूर्व सांसद गजसिंह, प्रख्यात शाइर शीन काफ निजाम व शीन मीम हनीफ सहित शहर के कई शायर इस कार्यक्रम को सुनने के लिए देर रात तक बारादरी में जमे रहे थे। वह कार्यक्रम शाम 7.30 बजे शुरू हुआ था और सुबह चार बजे तक चला था।
मेहदी हसन को मोहब्बत करने वाले कम नहीं हुए
अतीत के झरोखे गवाह हैं कि मेहदी हसन ने अपने गजल गायन के दौरान... मोहब्बत करने वाले कम न होंगे, तेरी दुनिया में लेकिन हम न होंगे...राग किरवाणी में, केसरिया बालम आओ नी राजस्थानी माण्ड ..पधारो म्हारे देस..और ..गजल... रंजिश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ...राग यमन में...और...दिल से कि जां से उठता है ये धुंआ सा कहां से उठता है...राग किरवाणी में..आदि गजलें पेश कर रसिक सुधि श्रोताओं की वाहवाही पाई थी। स्वर सुधा के अध्यक्ष बीडी जोशी के अनुसार अहमदाबाद के मशहूर आर्किटेक्ट अशोक पुरोहित मेहदी हसन को जोधपुर लाए थे।
-एम आई जाहिर
Published on:
10 Apr 2018 06:33 pm
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