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Painting News : जोधपुर में एक भी परमानेंट आर्ट गैलरी नहीं

जोधपुर में पेन्टर्स बहुत हैं, लेकिन परमानेंट आर्ट गैलरी एक भी नहीं है।

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जोधपुर

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MI Zahir

Apr 23, 2018

holi in painting

painting

जोधपुर . न दरिया है न अब कच्चे घडे़ हैं, ये मंजर तो बस शीशों में जड़े हैं। अगर किसी शानदार पेंटिंग की बात हो तो जेहन औैर दिल एक खुशनुमा एहसास से भर जाता है, मगर अपने फन के माहिर चित्रकारों की बनाई इन तस्वीरों में कहीं गांव की गोरी, सिसकती जमीन, बिलखता पर्यावरण,कोंपलों की उमंगें, टूटती आस, लव बर्ड्स, दूर गगन में उड़ते पंछी, लहराती जुल्फें,डांस का मंजर, खुशियों का समां और भी बहुत कुछ नजर आता है, लेकिन ये सभी खूबसूरत कलात्मक पेन्टिंग अब मेलों, होटलों, बंगलों के ड्राइंग रूम और शॉपिंग मॉल में तो दिखाई दे रही हैं, मगर राज्य की सांस्कृतिक राजधानी जोधपुर मेंं एेसा कोर्ई स्थान नहीं है, जहां आर्टिस्ट अपनी कलाकृतियां आम जन के लिए स्थाई रूप से प्रदर्शित कर सकें। यानी यहां पेंटिंग के लिए कोई स्थाई आर्ट गैलरी नहीं है। हालांकि मेहरानगढ़ के जापा महल में आर्ट गैलरी है, लेकिन वह भी विदेशी सैलानियों पर निर्भर है।

पेन्टर्स को परेशानी
जोधपुर में कोई परमानेंट सरकारी आर्ट गैलरी न होने से चित्रकारों को पेन्टिंग वर्कशॉप और प्रदर्शनी लगाने में दिक्कत पेश आ रही है। नतीजतन वे एेसी संस्थाओं, होटलों व सभागारों की ओर देखने लगे हैं जो उनके लिए फण्डिंग या सहायतार्थ प्र्रदर्शनी लगवा सकें। इस कारण विश्वविख्यात हस्तशिल्प व चित्रकला के चित्रकार केंद्र व राज्य सरकार की उपेक्षा का शिकार हैं। यह हालत तब है जबकि जोधपुर का हस्तशिल्प व चित्रकला विश्वविख्यात है और यहां की कलाकृतियां दुनिया भर में निर्यात की जाती हैं।

पहुंच से परे रही टाउन हॉल आर्ट गैलरी

तत्कालीन संभागीय आयुक्त किरण सोनी गुप्ता ने स्थानीय कलाकारों के हितार्थ टाउन हॉल में आर्ट गैलरी बनवाई थी, उनकी सोच यह थी कि जोधपुर के चित्रकार अपना सृजन आम जनता के लिए प्रदर्शित कर सकें, लेकिन यह गैलरी एसी हॉल होने की वजह से इसका किराया आम चित्रकार की जेब से परे रहा। नतीजतन यह प्रयोग भी व्यावहारिक नहीं रहा।
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यह है जोधपुर के कैनवास का बैकग्राउंड
मारवाड़ रियासत के आर्टिस्ट लब्ध प्रतिष्ठ चित्रकार भत्तूलाल शर्मा ने रियासतकाल में चित्रकला में अमिट छाप छोड़ी तो उनके कई शिष्यों ने भी आर्ट की दुनिया में नाम कमाया है। उनके बाद मशहूर चित्रकार चतुर्भुज शर्मा ने भी जोधपुर के कई उभरते चित्रकारों को तराशा। यही नहीं, भत्तूलाल शर्मा व ए एच मूलर के शिष्य प्रख्यात चित्रकार मोहनलाल शर्मा ने बहुत खूबसूरत चित्र बनाए, जो आज भी राज प्रासादों व देश विदेश में विख्यात हैं। उनके शिष्य धर्मदास हीरानंदानी ने चित्रकला में महारत हासिल कर मुंबई में प्रसिद्ध अभिनेता प्राण के कई वर्षों तक जीवंत चित्र बनाए, उन्होंने चित्रकला में मारवाड़ को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया। जबकि सुखदेव मुनि ने रेलवे में ड्राफ्ट्समैन पद पर रहते हुए मोहनलाल शर्मा के सान्निध्य मंें यथार्थवादी चित्रकला के क्षेत्र में कार्य किया और ब्लैक इंक से चित्र बनाने में विशेषज्ञता प्राप्त की। फौजमल पुरोहित ने चित्रकला अध्यापक होते हुए चित्रकला के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किया, जो चित्रकला के क्षेत्र में संगे मील की हैसियत रखते हैं।

बढ़ता गया कैनवास का दायरा

जोधपुर के पेन्टर कन्हैयालाल कन्नूÓ अपने जमाने के मशहूर चित्रकार थे, जिनकी पेंटिंग देखने के लिए लोग दूर-दूर से आया करते थे। इन्ही हस्तियों के अलग-अलग क्षेत्र में कई शिष्य हुए, इनमें डॉ. ज्योतिस्वरूप शर्मा ने विदेशों में जा कर अपनी कला का जीवंत प्रदर्शन किया और कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए। वहीं लालसिंह भाटी ने भी चित्रकला व हस्तशिल्प कला क्षेत्र में मारवाड़ के कई नवोदित चित्रकारों को कला की बारीकियांें से प्रशिक्षित किया और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किए। इसी प्रकार सैयद मेहर अली ने चित्रकला जगत में अपनी पहचान बनाई है। उनके अथक प्रयासों से विश्वविद्यालय में चित्रकला विषय का कोर्स शुरू हुआ, जिससे कई विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं रतनसिंह राजपुराहित ने पैन्सिल स्कैच व अॅाइल पेंटिंग में रियलिस्टिक पेन्टिंग में अदभुत कार्य किया। इसी फेहरिस्त में भीकाराम प्रजापत,माणक जोशी, महेशचंद्र शर्मा, बंसीलाल व्यास, जवानमल जोशी, खुर्शीद अहमद, गोविंद जोशी व मोहम्मद रफीक पिन्टू आदि के नाम प्रमुख हैं। उभरते चित्रकारों में हरिसिंह भाटी, अजय राजपुरोहित, सुशील शर्मा, कुमारी ममता शर्मा, अमित जोशी, पप्पूकुमार गर्ग, सोनम शर्मा, नम्रता स्वर्णकार, जयदीप दैया, दीपशिखा व्यास, चंद्रा व्यास, आलोक मिश्रा व ऋचा शर्मा आदि के नाम शामिल हैं।

इनका कहना है

चित्रकारों के लिए आर्ट गैलरी होना चाहिए। पेन्टर अपनी पेन्टिंग्स की प्रदर्शनी केवल कला मर्मज्ञ माणकलाल गोलिया अपनी खास बाग आर्ट गैलरी में स्थानीय कलाकारों के लिए निशुल्क उपलब्ध करवाते थे। उनका उद्देश्य कला और कलाकार को प्रोत्साहित करना था।
-डॉ. ज्योतिस्वरूप शर्मा

मारवाड़ रत्न से सम्मानित चित्रकार, जोधपुर

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- एम आई जाहिर