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रेशमी धागे से बंधा प्यार, आंसुओं संग घुल जाती है गर्व की मिठास

जोधपुर

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Newsdesk

Aug 25, 2026

Rajasthan

- रक्षाबंधन पर शहादत को नमन: ‘थार के वीर’ आठ साल से निभा रहे अपनों का फर्ज
- सम्मान का रक्षासूत्र लेकर आज से 35 शहीद परिवारों के घर पहुंचेंगे टीम के सदस्य

ह्यूमन एंगल

बाड़मेर. रक्षाबंधन की सुबह जहां हर घर में हंसी-ठिठोली गूंजती है, वहीं शहीद परिवारों में अपने सपूत की याद में आंखें छलक जाती हैं। पूजा की थाली सजती है, रेशम का धागा मुस्कुराता है, लेकिन सामने कलाई नहीं होती... बस दीवार पर टंगी एक तस्वीर और कांच के फ्रेम में फौजी वर्दी होती है। वीरांगना जब कांपते हाथों से उस तस्वीर के आगे दीपक जलाती है तो आंखें भर आती हैं। इन आंसुओं को पोंछने के लिए थार की मरुधरा पर एक अनूठी संवेदना सांस ले रही है। थार के वीर संस्थान पिछले आठ वर्षों से ‘रक्षाबंधन का त्योहार-वीर शहीदों के द्वार’ अभियान के जरिए शहीदों को नमन कर रही है।

इस बार भी 25 से 28 अगस्त तक संस्थान के सदस्य बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर और जालोर के 30 से 35 शहीद परिवारों के घर-घर जाकर वीरांगनाओं व परिजनों को रक्षासूत्र, मिठाई और उपहार भेंट कर रक्षाबंधन मनाएंगे। जब संस्थान के सदस्य हाथों में मिठाई, उपहार और रक्षासूत्र लेकर द्वार पर खड़े होते हैं तो वीरांगना और शहीद के माता-पिता को लगता है कि उनके बेटे का फर्ज पूरा करने के लिए पूरा प्रदेश उनके घर आ गया है।

Bइसलिए की शुरुआत B
जिला मुख्यालय पर सिर्फ विजय दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर ही शहीद परिवारों को आमंत्रित किया जाता था। दूर-दराज के गांवों से आने-जाने में पूरा दिन बीत जाता था और उन्हें खुद के खर्च पर देर रात घर लौटना पड़ता था। इसी कसक को मिटाने के लिए संस्थान के रघुवीरसिंह तामलोर, रावत त्रिभुवन सिंह और कमांडेंट प्रदीप कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में इस पहल की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य शहीदों के परिजन का मनोबल बढ़ाना, उनकी स्थानीय समस्याओं का समाधान खोजना है।

वर्जन
हम शहीद परिवारों के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम हर त्योहार में उनके साथ कुछ पल तो बांट ही सकते हैं। इन परिवारों के साथ खड़े रहना हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है।
- रघुवीर सिंह तामलोर, संयोजक

यह पहल पूरे राजस्थान को यह याद दिलाती है कि जिन शूरवीरों ने हमारे देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए, उनके पीछे छूटे परिवारों के साथ हर त्योहार, पर्व और सुख-दुख में खड़े रहना ही सच्ची देशसेवा है।
- रावत त्रिभुवन सिंह, संरक्षक