जोधपुर।
सरकारी कर्मचारियों के नि:शुल्क इलाज के लिए आरजीएचएस योजना की आड़ में घोटाले के लिए डॉक्टर व कैमिस्ट के साथ ही दलालों का नेक्सस चल रहा है। बासनी थाने में दर्ज करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच में सामने आया है कि घोटाले की राशि कैमिस्ट दवा दुकानदार, डॉक्टर, लाभार्थी व मध्यस्थ में बंटती थी। उधर, दवा दुकानदार के पकड़े जाने के बाद से एक दलाल भूमिगत है। हालांकि पुलिस को अंदेशा है कि ऐसे कई और दलाल सक्रिय थे। (RGHS Scam)
पुलिस के अनुसार प्रकरण में झंवर मेडिकल एजेंसीज से करीब पौने दो करोड़ रुपए की दवाओं का घोटाला किए जाने की पुष्टि हुई है। अब तक की जांच में सामने आया है कि घोटाले में न सिर्फ दवा दुकानदार बल्कि निजी अस्पताल और एम्स के कुछ चिकित्सक व मध्यस्थ भी शामिल हो सकते हैं। दवाइयों के घोटाले में सभी का समुचित हिस्सा होता था। 25 प्रतिशत डॉक्टर और 25 प्रतिशत कैमिस्ट का होता था। 40 प्रतिशत हिस्सा आरजीएचएस कार्ड लाभार्थी और दस प्रतिशत हिस्सा मध्यस्थ को दिया जाता था।
थानाधिकारी जितेन्द्रसिंह का कहना है कि झंवर मेडिकल एजेंसीज का मालिक जुगल झंवर रिमाण्ड पर है। उससे पूछताछ की जा रही है।निजी अस्पताल व एम्स के चिकित्सकों की संदिग्ध भूमिका है। जांच चल रही है।
गौरतलब है कि जांच के बाद घोटाला उजागर होने पर आरजीएचएस के संयुक्त परियोजना निदेशक डॉ अभिषेक सिंह हकिलक ने गत 26 सितम्बर को बासनी थाने में झंवर मेडिकल एजेंसीज व 44 कार्ड धारक व लाभार्थियों के खिलाफ करोड़ों रुपए के घोटाले का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने 27 सितम्बर को कैमिकल जुगल झंवर को गिरफ्तार कर रिमाण्ड पर लिया था।
आरजीएचएस कार्ड से तीन तरह से हो रहा है घोटाला
– अहमदाबाद में जांच, दवाइयां जोधपुर के कैंसर विशेषज्ञ से
इस घोटाले में जिन लाभार्थियों के कार्ड से घोटाला किया गया है उनमें अधिकांश कैंसर पीडि़त मरीज हैं। बेहतर इलाज व विशेषज्ञ के लालच में अनेक मरीजों ने अहमदाबाद में जांचें करवाईं थी, लेकिन दवाइयां कीमती होने से खरीदी नहीं। जोधपुर लौटकर डॉक्टर से सांठ-गांठ कर आरजीएचएस कार्ड से वही दवाइयां लिखवा ली और नि:शुल्क दवाएं लेना शुरू कर दिया।
– जरूरत से अधिक दवाओं का बिल बनाकर बिल उठाए
कुछ मरीज व लाभार्थी ऐसे हैं कि उन्होंने आरजीएचएस योजना का लाभ तो लिया, लेकिन इस दौरान उन्हें जितनी दवाइयों की जरूरत होती थी, उससे कहीं अधिक दवाइयाें का बिल आरजीएचएस से उठा लिया जाता था। यानि मरीज को जितनी दवाइयों की जरूरत होती थी उससे अधिक दवाइयां उठा ली जाती थी।
– बगैर किसी बीमारी के आरजीएचएस से इलाज व दवाइयां
आरजीएचएस के ऐसे अनेक कार्ड धारक हैं जिन्होंने अपनी बीमारी का आरजीएचएस के तहत इलाज नहीं करवाया। यदि करवाया भी है तो सामान्य बीमारी व न्यूनतम दवाएं लीं। जबकि वास्तविकता में उनके कार्ड से सम्पूर्ण इलाज व बड़ी मात्रा में कीमती दवाएं ले ली गईं और बिल भी उठा लिया गया।
पुलिस-औषधी नियंत्रक विभाग ने स्टॉक की ली जानकारी
आरजीएचएस के संयुक्त परियोजना के निदेशक डॉ अभिषेक सिंह किलक की अगुवाई में अतिरिक्त औषधी नियंत्रक, औषधी निरीक्षक और औषधी नियंत्रक विभाग के कर्मचारियों ने जालोरी गेट के भीतर झंवर मेडिकल एजेंसीज में दवाओं का भौतिक सत्यापन शुरू किया। रात तक कार्रवाई के दौरान दवाइयों की खरीद, बिक्री के साथ-साथ दुकान में मौजूद दवाइयों के स्टॉक की जानकारी जुटाई गई। इनके विश्लेषण से स्पष्ट हो पाएगा कि खरीद व बिक्री की तुलना में दुकान में कितना स्टॉक मौजूद है। उसी से अनियमितताओं का पता लग पाएगा। भौतिक सत्यापन के दौरान पुलिस भी मौजूद रही। रिमाण्ड पर रहे दुका संचालक जुगल को भी दुकान लाया गया।