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डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज और भारत सरकार की रिसर्च एजेंसी वैज्ञानिक व औद्योगिक, अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के बीच शोध और अकादमिक गतिविधियों के आदान प्रदान के लिए एमओयू हुआ है। ये दोनों संस्थान पश्चिमी राजस्थान में जन्मजात बीमारियों के आनुवंशिक निदान कर उसके सफल इलाज के लिए मिलकर शोध, एजुकेशन पर काम करेंगे। इसके लिए यहां लैब भी स्थापित करेंगे। इस प्रोजेक्ट में पश्चिम राजस्थान में आनुवंशिक विकार से संबंधित बहुआयामी वैज्ञानिक तकनीकी और शैक्षिक मुद्दे शामिल होंगे।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एलएल भाट ने बताया कि इसमें पीडियाट्रिक यूरोलॉजी जेनेटिक्स डिसऑर्डर, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी एंड न्यूरोजेनेटिक्स डिसऑर्डर से संबंधित शोध के लिए दोनों संस्थानों की फैकल्टी सुविधाओं के उपयोग और स्टाफ और छात्रों के आदान प्रदान के लिए प्रावधान है। इससे पश्चिमी राजस्थान की जनता के लिए बेनिफिट यह रहेगा कि जिन बीमारियों का निदान नहीं पाता था, उनका सीएसआईआर-आईजीआईबी की सहायता से निदान संभव हो सकेगा। पिछले 10 महीनों में लगभग 25 हजार बच्चों और उनके परिवारों की न्यूरोलॉजिक और यूरोलॉगिक विकारों के लिए जांच की गई है। उसमें करीब 450 बच्चों को निदान संबंधी परीक्षण के लिए दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों का नमूना दिया गया है। लगभग ३६ परिवारों को जन्मपूर्व आनुवंशिक परीक्षण की पेशकश की गई है। डॉ. भाट के मार्गदर्शन में डॉ. गोवर्धन चौधरी और डॉ. तेजेंद्र अनुसंधान करेंगे।
अधिकांश परिवारों को मिलेगी राहत
दोनों संस्थाओं को इस कॉलेबोरेशन में दोनों संस्थाओं को कम से कम 90 प्रतिशत बच्चों के निदान पेश करने का अनुमान है। इसमें यूरोलॉजिक और न्यूरोलोगिक आनुवंशिक विकार वाले परिवारों में से अधिकांश में विकार को रोकने में मदद मिलेगी। इस प्रोजेक्ट की एज्युकेशन के लिए तीन दिन की सीएमई आयोजन भी बहुत जल्द किया जाएगा। इसमें डॉ. प्रमोद शर्मा के निर्देशन और डॉ. मनीष पारख के नेतृत्व में डॉ. अंकित पांडे, डॉ. अनूप सिंह गुर्जर, स्त्री एवं प्रसुति रोग विभाग की डॉ. पूनम पारख की टीम आनुवंशिक निदान की सुविधा स्थापिक करने में जुटे हुए हैं।
Published on:
12 Apr 2017 09:16 pm

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