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़भारत के वायसराय 1896 में जोधपुर पहुंचे तो यूं हुआ था स्वागत

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़भारत के वायसराय 1896 में जोधपुर पहुंचे तो यूं हुआ था स्वागत

़भारत के वायसराय 1896 में जोधपुर पहुंचे तो यूं हुआ था स्वागत

जोधपुर. अपने पिता महाराजा जसवन्तसिंह की स्मृति जसवंत थड़ा का निर्माण करवाने वाले उनके पुत्र महाराजा सरदारसिंह का जन्म 11 फरवरी 1880 को हुआ था। महाराजा सरदारसिंह 24 अक्टूबर 1895 को जोधपुर का राजकाज संभाला तब उनकी अवस्था 16 वर्ष से भी कम थी। इसलिए उनके चाचा महाराजा प्रतापसिंह मुसाहिब आला बनाए गए थे और राज्य का कार्य पुरानी काउन्सिल की सहायता से उनके तत्वावधान में होने लगा। जब 24 नवम्बर 1896 को भारत के वायसराय लॉर्ड एल्गिन जोधपुर आए तो जोधपुर रेलवे स्टेशन पर आकर्षक शेरवानी और साफा पहने महाराजा सरदारसिंह ने उनका स्वागत किया था। उसी दिन वायसराय ने तलहटी के महल में जसवंत फीमेल अस्पताल का उदघाटन किया था। उसके बाद 26 नवम्बर को वायसराय एल्गिन ने राजपूत स्कूल का उद्घाटन भी किया था। सरल स्वभाव, मृदुभाषी, दयालु और आडम्बर शून्य महाराजा सरदारसिंह का स्वर्गवास 20 मार्च 1911 में मात्र 31 वर्ष की अवस्था में हो गया था। जोधपुर के घंटाघर और सरदार मार्केट का शिलान्यास भी 11 मार्च 1910 को महाराजा सरदारसिंह ने ही किया था। महाराजा सरदारसिंह के प्रथम पुत्र महाराजकुमार सुमेरसिंह 4 जनवरी 1898 को और 8 जुलाई 1903 को दूसरे महाराजकुमार उम्मेदसिंह का जन्म हुआ । महाराजा अजीतसिंह का जन्म 1 मई 1907 को हुआ।

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