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पीले रुमाल को हथियार बनाकर 931 लोगों को उतारा मौत के घाट

ठग बेहराम का नाम गिनीज़ बुक में दर्ज़ है। बेहराम के नाम 931 सीरियल किलिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड आज भी उसी के नाम है।

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Akansha Singh

Jul 17, 2016

thief

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विनोद निगम
कानपुर। आपने अनेक ठग, बदमाश, नटवरलाल, डकैत, क्रिमिनलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। लेकिन आजादी के पहले एक ऐसा ठग था जो अपने रुमाल के जरिए वारदात को अंजाम देता था। हम बात कर रहे हैं एक ठग बेहराम सिंह की। जिसने 10 साल के करियर के दौरान सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया था। ठग बेहराम ने कानपुर शहर के लोगों को भी नहीं बख्शा।

कानपुर कलेक्टरगंज के कारोबारी रमेश गुप्ता ने बताया कि, उनके परदादा को बहराम ने ठगी कर अपना शिकार बनाया था। ठग ने परदादा से रुपए पैसे लेने के बाद मौत के घाट उतार दिया था। परदादा के चचेरे भाई किसी तरह से अपनी जान बचाकर भागने में कामयाब रहे थे। ठग बेहराम का नाम गिनीज़ बुक में दर्ज़ है। बेहराम के नाम 931 सीरियल किलिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड आज भी उसी के नाम है।

खून से लगता था उसे डर

जिस रास्ते से वो गुजरता था, वहां कोसों दूर इंसान तो क्या इंसानों की छाप तक मिलनी बंद हो जाती थी। जहां जहां भी वो जाता, लोग इलाका खाली कर उसकी पहुंच से दूर निकल जाते। इंसान के भेष में वो था एक खूंखार जानवर। पैसे के लिये वो लोगों को अपना निशाना बनाता था और उसका हथियार होता था एक पीला रुमाल। वो रुमाल से देता था अपने शिकार को मौत। क्योंकि खून से लगता था डर। पीले रुमाल से एक नहीं, दो नहीं, पूरे 931 लोगों को मौत के घाट उतारा। बेहराम को दुनिया का आजतक का सबसे क्रूर सीरियल किलर का खिताब हासिल है।

ब्रिटिश पुलिस के लिए बेहराम बना सिरदर्द

ब्रिटिश पुलिस देश में कानून व्यवस्था दुरूस्त करने में जुटी थी। 1765 से लेकर 1840 के बीच दिल्ली से जबलपुर के रास्ते में पड़ने वाले थानों में कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता था जब कोई पीड़ित आदमी अपने किसी करीबी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज ना कराने आता हो। अंग्रेज अफसर परेशान थे कि, इतनी बड़ी तादाद में लोग कैसे गायब हो रहे हैं।

कानपुर इलाहाबाद, बनारस के साथ ही बिहार, बंगाल, कराची, लाहौर, मंदसौर, मारवाड़, काठियावाड़, मुर्शिदाबाद के व्यापारी बड़ी तादाद में रहस्यमय परिस्थितियों में अपने पूरे की पूरे काफिलों के साथ गायब हो जाते थे। लखनऊ कानपुर, बनारस की खूबसूरत तवायफ हों, डोली में बैठकर ससुराल जाती नई नवेली दुल्हनें या फिर बंगाल से इलाहाबाद और बनारस की तीर्थयात्रा पर आने वाले दल, सभी रास्ते से गायब हो रहे थे। पुलिस की फाइलें लगातार गायब हो रहे लोगों की शिकायतों से बढ़ती जा रही थीं। लेकिन अंग्रेज अफसर चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे थे।

10 साल की मशक्कत के बाद हाथ लगा

1809 में इंग्लैंड से भारत आने वाले अंग्रेज अफसर कैप्टन विलियम स्लीमैन को ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगातार गायब हो रहे लोगों के रहस्य का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी। थोड़े ही दिनों में कैप्टन स्लीमैन को पता चल गया कि. इन लोगों के गायब होने के पीछे किसका हाथ है। इस गिरोह में करीब 200 सदस्य थे। इस गिरोह का मुखिया था बेरहाम नाम का एक क्रूर इंसान, जो हाईवे और जंगलों में अपने साथियों के साथ घोड़ों पर घूमता रहता था। कैप्टन विलियम स्लीमैन ठगों के खिलाफ विलियम स्लीमैन ने पूरे उत्तर भारत में एक मुहिम छेड़ दी। ईस्ट इंडिया कंपनी ने विलियम स्लीमैन को इंचार्ज बना दिया। इस ऑफिस का मुख्यालय स्लीमैन ने जबलपुर में बनाया। करीब 10 साल की कड़ी मशक्कत के बाद कैप्टन स्लीमैन ने आखिरकार बेहराम ठग को गिरफ्तार कर लिया।

नए सदस्यों को कब्र में बैठाकर खिलाता था गुड़

पूछताछ के दौरान बेहराम ने पुलिस के बताया कि, जब भी किसी भी नए सदस्य को अपने गिरोह में शामिल करता तो उसे कब्रगाह पर बैठकर गुड़ जरुर खिलाया करता था। कैप्टन स्लीमैन ने एक ठग से इसका कारण पूछा तो उसने जबाब दिया कि हजूर ‘तपोनी’ यानि कब्रगाह का गुड़ जिसने भी चखा उसके लिये दुनिया ही दूसरी हो गई। अगर आपने भी तपोनी का गुड़ खा लिया तो फौरन ठग बन जाओगे। बेहराम ठग ने गिरफ्तार होने के बाद खुलासा किया कि, उसके गिरोह ने पीले रुमाल से पूरे 931 लोगो को मौत के घाट उतारा है। उसने ये भी खुलासा किया कि, अकेले उसने ही 150 लोगों के गले में रुमाल डालकर हत्या की है। बेहराम की गिरफ्तारी के बाद उसके गिरोह के बाकी सदस्य भी पुलिस के हत्थे चढ़ गए। बेहराम सहित जितने भी इस गिरोह के कुख्यात सदस्य थे उन्हें जबलपुर के पेड़ों पर फांसी दे दी गई थी। बलपुर में ये पेड़ अभी भी हैं। इस बंदीगृह के अवशेष अभी भी जबलपुर में मौजूद हैं।

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