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शिवपाल यादव ने अपने जन्मदिन पर 75 जिलों के समर्थकों को बुलाया, कर सकते हैं बड़ा ऐलान

अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव को जन्मदिन की शुभकामानाएं दीं...

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Shivpal Yadav Birthday

विनोद निगम
कानपुर.विधानसभा चुनाव 2017 से पूर्व शुरू हुई समाजवादी पार्टी के अंदर की रार, निकाय तक जारी रही। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव को पार्टी ने हासिये पर ढकेलकर, उन्हें सिर्फ इटावा तक ही सीमित कर दिया। इस दौरान शिवपाल सिंह यादव ने कई बार बागी तेवर दिखाये, पर मुलायम सिंह के चलते वह कोई बड़ा निर्णय नहीं ले पाये। लेकिन बसंत पंचमी के दिन (22जनवरी) को शिवपाल अपना 63 वां जन्मदिन मनाएंगे और इसके चलते उन्होंने 75 जिलों से अपने समर्थकों को कुनैरा के पास वृंदावन गार्डन बुलाया है। यादव परिवार से जो तो बात निकल कर आ रही है, उसके मुताबिक पूर्व मंत्री शिवपाल पूर्व सीएम अखिलेश को अपनी ताकत दिखाएंगे और नई सियासी पारी का ऐलान कर सकते हैं। परदे के पीछे शिवपाल गुट के नेताओं ने इसकी पूरी व्यूह रचना तैयार कर ली है। कानपुर नगर, देहात से कई कद्दावर सपाई शिवपाल के जलसे में शामिल होने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

बसंत पंचमी के दिन कर सकते हैं बड़ा ऐलान
पिछले डेढ़ से साल से पूर्व मंत्री शिवपाल यादव को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सिर्फ इटावा तक सीमित कर रखा है। उन्हें पार्टी की किसी बैठक में नहीं बुलाया जाता। निकाय चुनाव के वक्त उनके करीबियों को टिकट नहीं दिए गए, जिसका परिणाम रहा कि घाटमपुर, बिल्हौर, बिठूर और शिवराजपुर में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। बिल्हौर से नगर पालिका की कुर्सी पर शिवपाल के करीबी घाटमपुर में सपा चुनाव हार गई। निकाय हारने के बाद शिवपाल ने खुल कर बोलना शुरू किया और जल्द ही अपनी नई पारी शुरू करने का ऐलान किया था। यहां तक शिवपाल यादव ने अपनी कार से सपा का झंडा भी उतार दिया था और सैफई से यह बात निकल कर आई कि मुलायम सिंह के अनुज पंजा या भाजपा का दामन साथ सकते हैं। लेकिन मुलायम सिंह फिर से सामने आए और शिवपाल यादव के नई पार्टी बनाने या अन्य दूसरे दलों में जाने की अटकलों पर विराम लगा दिया। पर शिवपाल यादव अपने जन्मदिन पर नई पारी का ऐलान कर सकते हैं और इसकी पूरी प्लानिंग भी हो चुकी है।

भाजपा पर जाने की अटकलें तेज
इटावा, कानपुर नगर व देहात के सपा कार्यकर्ताओं को भी इस बात की भनक लग चुकी है कि उनके पुरानी सारथी बसंत पंचमी के दिन अगल राह पकड़ सकते हैं। शिवपाल गुट के कई बड़े नेता खुलकर तो कुछ नहीं बोलते, लेकिन इशारों-इशारों में इतना जरूर कहते हैं कि डेढ़ साल पूर्व मंत्री ने अखिलेश यादव को संभलने के लिए दिया। लेकिन कुछ राजनेताओं के चलते उन्होंने शिवपाल यादव को पार्टी में पद नहीं दिया। इसी के चलते वह जन्मदिन के अवसर पर अपने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे और आगे क्या करना चाहिए इस पर उनकी राय लेंगे। जानकारों की मानें तो भाजपा के दो नेताओं ने शिवपाल से संपर्क साधा है और पार्टी ज्वॉइन करने को कहा है। राजनीति के महिर खिलाड़ी शिवपाल यादव नफा-नुकसान का आंकलन कर निर्णय लेंगे। भाजपा में अगर शिवपाल सिंह शामिल होते हैं तो सपा का खेल बिगाड़ सकते हैं।

कुनैरा के वृंदावन गार्डन में बनाएंगे जन्मदिन
बसंत पंचमी के दिन शिवपाल यादव अपना जन्मदिन घर के बजाय इटावा के कुनैरा के पास वृंदावन गार्डन में मनाएंगे। अपने सभी समर्थकों को शिवपाल ने बकायदा आमंत्रित किया है। समारोह में इटावा, कानपुर नगर, देहात, कन्नौज, मैनपुरी, औरैया, फतेहपुर के साथ ही अन्य जिलों के शिवपाल समर्थक एकत्रित होंगे। कानपुर के एक कद्दावर सपा नेता ने कहा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव पिछले जनवरी 2017 से सपा में हाशिये पर चल रहे हैं। उन्हें एक साल से सपा में अपनों के बीच बेगानों की तरह से रहना पड़ रहा है। सपा की नीति नियंता समिति में उनके लिए कोई स्थान नहीं रखा गया है। सपा के सर्वेसर्वा अब पूर्व सीएम अखिलेश यादव हैं। चाचा एवं भतीजे के बीच सुलह के तमाम प्रयास समय समय पर हुए परंतु कोई सफलता नहीं मिली। संभावनाओं के सारे रास्ते बंद होते देख अब शिवपाल सिंह यादव जन्मदिन पर बड़ा निर्णय लेंगे और हम जैसे सैकड़ों समाजवादी उनके साथ खड़े नजर आएंगे।

कई नेता जन्मदिन पर होंगे शामिल
कानपुर नगर व देहात के सपा के ऐसे कई बड़े चेहरे हैं जो पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह के जन्मदिन के अवसर पर उनके हाथों से केक खाते हुए देखे जाएंगे। शिवपाल सिंह यादव गुट से जुड़े संजय शुक्ला ने बताया कि कुनैरा के पास वृंदावन गार्डन में होने जा रहे जन्म दिवस समारोह में प्रदेश भर के समाजवादी नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इसमें आने वाले समय की रणनीति पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे जिले के कार्यकर्ता शिवपाल सिंह यादव के साथ हैं। वे जो भी निर्णय करेंगे। उस पर हम सभी लोग अमल करेंगे। हालांकि, शिवपाल सिंह यादव ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। माना जा रहा है कि कार्यकर्ताओं के बीच शिवपाल सिंह मन की बात जरूर कहेंगे। यहीं से आने वाले लोकसभा चुनाव में उनका रुख भी स्पष्ट हो जाएगा। वहीं जानकारों का मानना है कि शिवापाल यादव पहले अपनी ताकत दिखाएंगे और अखिलेश यादव पर दबाव बनाने के लिए निर्णय को कुछ दिन और टाल सकते हैं।