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Rajasthan: पांचवें टाइगर रिजर्व की मंजूरी से जागी उम्मीद, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

Dholpur-Karauli Tiger Reserve: कैलादेवी अभयारण्य और धौलपुर के जंगलों को मिलाकर प्रदेश में पांचवें टाइगर रिजर्व की मंजूरी मिलने से जिले के कैलादेवी अभयारण्य में अब विकास को पंख लगने की उम्मीद है।

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करौली

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Kirti Verma

Aug 26, 2023

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करौली/दिनेश शर्मा. Dholpur-Karauli Tiger Reserve: कैलादेवी अभयारण्य और धौलपुर के जंगलों को मिलाकर प्रदेश में पांचवें टाइगर रिजर्व की मंजूरी मिलने से जिले के कैलादेवी अभयारण्य में अब विकास को पंख लगने की उम्मीद है। यूं तो कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से बाघों की दहाड़ गूंज रही है और बाघों का मूवमेंट भी खूब बना रहता है, लेकिन वर्षों बाद भी यह क्षेत्र विकसित नहीं हो सका है।

न तो यहां पर्यटकों का आना शुरू हुआ और न ही वन विभाग की ओर से इस दिशा में कोई खास कदम उठाए गए हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने इस अभयारण्यं क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तीन सफारी रूटों की मंजूरी दी थी, जिसके बाद गत वर्ष अक्टूबर माह में पर्यटन सफारी का आगाज तो हो गया, लेकिन यह पर्यटन सफारी एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। गौरतलब है कि नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने करौली-धौलपुर के जंगलों को मिलाकर प्रदेश में पांचवां टाइगर रिजर्व बनाना तय किया है।

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रणथम्भौर में बाघों की बढ़ती संख्या के बीच पिछले वर्षों में कई बाघों ने कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र की ओर रुख किया। हालांकि ये बाघ कभी रणथम्भौर तो कभी धौलपुर तक आते-जाते रहे हैं। बीते वर्षों में यहां टी-118, टी-80 तूफान, टी-72 सुल्तान, टी-92 सुंदरी आदि बाघ-बाघिनों ने दस्तक दी थी। इनमें से टाइगर सुल्तान और सुंदरी का तो जोड़ा ही बन गया। इन दोनों को मण्डरायल क्षेत्र का नींदर रेंज खूब भाया और यहां पर लम्बे समय तक ठहराव भी किया। इसी बीच इस जोड़े ने दो शावकों को जन्म देकर कैलादेवी अभयारण्य में खुशखबरी भी फैलाई। वहीं टी 118 ने भी दो शावकों को कैलादेवी रेंज के नाका राहर इलाके में जन्म दिया। वर्तमान में कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में तीन बाघ विचरण कर रहे हैं। लेकिन कुछेक बाघों को छोड़कर अधिकांश बाघ इस इलाके में अपनी स्थाई टेरेटरी नहीं बना सके। कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र रणथम्भौर के बफर जोन में शामिल है।

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बाघों के लिए है आदर्श आश्रय स्थल
वन विभाग के सूत्र कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र को बाघों के लिए हर दृष्टि से अनुकूल बताते हैं। करीब 72 हजार 131 हैक्टेयर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य क्षेत्र बाघों के लिए आदर्श आश्रय स्थल बन सकता है।

रणथंभौर अभयारण्य को कॉरिडोर बनाकर टाइगर हेबिटेट जोन विकसित करने की भी मंशा इसी उद्देश्य से की गई थी, लेकिन लम्बे समय तक इस ओर अधिक ध्यान नहीं दिया गया। अब पांचवें टाइगर रिजर्व में इसको शामिल करने से इसके विकास की उम्मीद है।


करौली-धौलपुर के जंगलों को मिलाकर प्रदेश में पांचवां टाइगर रिजर्व की मंजूरी से निश्चित रूप से कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र विकसित होगा। बाघों के लिए रणथम्भौर-करौली और धौलपुर तक एक नया कॉरीडोर बन जाएगा, जिससे बाघों का मूवमेंट बढ़ेगा। आने वाले समय में पर्यटक भी इलाके में आएंगे तो विकास के रास्ते खुलेंगे।
नाहर सिंह सिनसिनवार, उपवन संरक्षक, करौली